Image from Google Jackets

Apaka banti / Mannu Bhandari.

आपका बंटी / मन्नू भंडारी. By: Language: Hindi Publication details: New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2025.Edition: 4th editionDescription: 128 pages ; 22 cmISBN:
  • 9788183618892 (hardback)
Subject(s): DDC classification:
  • 891.433 BHA/A
Summary: 'आपका बंटी' मन्नू भंडारी का हिन्दी साहित्य का एक कालजयी मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक उपन्यास है। यह उपन्यास बंटी नामक एक बालक की संवेदनशील दृष्टि से टूटते हुए वैवाहिक संबंधों, तलाक, पुनर्विवाह और उनके कारण उत्पन्न पारिवारिक विघटन का मार्मिक चित्रण करता है। माता-पिता के अलगाव के बीच बंटी के मन में उत्पन्न अकेलापन, असुरक्षा, भावनात्मक संघर्ष तथा पहचान के संकट को लेखिका ने अत्यंत यथार्थ एवं संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कृति बाल मनोविज्ञान, पारिवारिक संबंधों, बदलते सामाजिक मूल्यों तथा आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर गहन प्रकाश डालती है और पाठकों को मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक उत्तरदायित्व तथा सामाजिक परिवर्तन पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
List(s) this item appears in: Newly Arrived Books - 18-08-2026
Tags from this library: No tags from this library for this title. Log in to add tags.
Star ratings
    Average rating: 0.0 (0 votes)
Holdings
Cover image Item type Current library Home library Collection Shelving location Call number Materials specified Vol info URL Copy number Status Notes Date due Barcode Item holds Item hold queue priority Course reserves
Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.433 BHA/A (Browse shelf(Opens below)) Available RB1554
Total holds: 0

Originally published in 1971.

'आपका बंटी' मन्नू भंडारी का हिन्दी साहित्य का एक कालजयी मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक उपन्यास है। यह उपन्यास बंटी नामक एक बालक की संवेदनशील दृष्टि से टूटते हुए वैवाहिक संबंधों, तलाक, पुनर्विवाह और उनके कारण उत्पन्न पारिवारिक विघटन का मार्मिक चित्रण करता है। माता-पिता के अलगाव के बीच बंटी के मन में उत्पन्न अकेलापन, असुरक्षा, भावनात्मक संघर्ष तथा पहचान के संकट को लेखिका ने अत्यंत यथार्थ एवं संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कृति बाल मनोविज्ञान, पारिवारिक संबंधों, बदलते सामाजिक मूल्यों तथा आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर गहन प्रकाश डालती है और पाठकों को मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक उत्तरदायित्व तथा सामाजिक परिवर्तन पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

There are no comments on this title.

to post a comment.
📊 Library Statistics
📚
0
Books
💻
0
E-Books
📰
0
E-Journals
🎓
0
Theses
📖
0
E-Theses & Dissertations
📰
0
E-Magazines & Newspapers
🗄️
0
E-Databases
👥
0
Users