Apaka banti /
Bhandari, Mannu,
Apaka banti / Mannu Bhandari. - 4th edition. - New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2025. - 128 pages ; 22 cm.
Originally published in 1971.
'आपका बंटी' मन्नू भंडारी का हिन्दी साहित्य का एक कालजयी मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक उपन्यास है। यह उपन्यास बंटी नामक एक बालक की संवेदनशील दृष्टि से टूटते हुए वैवाहिक संबंधों, तलाक, पुनर्विवाह और उनके कारण उत्पन्न पारिवारिक विघटन का मार्मिक चित्रण करता है। माता-पिता के अलगाव के बीच बंटी के मन में उत्पन्न अकेलापन, असुरक्षा, भावनात्मक संघर्ष तथा पहचान के संकट को लेखिका ने अत्यंत यथार्थ एवं संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कृति बाल मनोविज्ञान, पारिवारिक संबंधों, बदलते सामाजिक मूल्यों तथा आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर गहन प्रकाश डालती है और पाठकों को मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक उत्तरदायित्व तथा सामाजिक परिवर्तन पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
9788183618892 (hardback)
Hindi fiction.
Domestic fiction.
Children of divorced parents --Fiction.
891.433 / BHA/A
Apaka banti / Mannu Bhandari. - 4th edition. - New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2025. - 128 pages ; 22 cm.
Originally published in 1971.
'आपका बंटी' मन्नू भंडारी का हिन्दी साहित्य का एक कालजयी मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक उपन्यास है। यह उपन्यास बंटी नामक एक बालक की संवेदनशील दृष्टि से टूटते हुए वैवाहिक संबंधों, तलाक, पुनर्विवाह और उनके कारण उत्पन्न पारिवारिक विघटन का मार्मिक चित्रण करता है। माता-पिता के अलगाव के बीच बंटी के मन में उत्पन्न अकेलापन, असुरक्षा, भावनात्मक संघर्ष तथा पहचान के संकट को लेखिका ने अत्यंत यथार्थ एवं संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कृति बाल मनोविज्ञान, पारिवारिक संबंधों, बदलते सामाजिक मूल्यों तथा आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर गहन प्रकाश डालती है और पाठकों को मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक उत्तरदायित्व तथा सामाजिक परिवर्तन पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
9788183618892 (hardback)
Hindi fiction.
Domestic fiction.
Children of divorced parents --Fiction.
891.433 / BHA/A