Anuvad ke bhashik paksh / Vibha Gupta.
Language: Hindi Publication details: New Delhi : Vani Prakashan; 2013Description: 120 pages ; 22 cmISBN:- 9788181436202(hbk)
- 418.02 GUP/A
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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Rajbhasha Book (Hindi)
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Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | RB | 418.02 GUP/A (Browse shelf(Opens below)) | Available | RB1674 |
Includes discussion of linguistic aspects of translation.
‘अनुवाद के भाषिक पक्ष’ विभा गुप्ता द्वारा लिखित अनुवाद-विषयक आलोचनात्मक एवं शोधपरक पुस्तक है। पुस्तक के उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह साहित्यिक अनुवाद में भाषा और शैली के अध्ययन से संबंधित एक लघु शोध-प्रबंध है तथा ‘प्रवीणन सिद्धान्त और साहित्यिक अनुवाद’ के व्यापक अध्ययन की प्रारंभिक कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। विभा गुप्ता इस पुस्तक का केंद्रीय विषय अनुवाद की भाषिक प्रकृति और साहित्यिक अभिव्यक्ति से जुड़ी समस्याएँ हैं। अनुवाद करते समय केवल शब्दों का एक भाषा से दूसरी भाषा में रूपांतरण पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मूल रचना के भाव, अर्थ, शैली और संदर्भ को भी सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। इसी दृष्टि से भाषिक संरचना, शब्द-चयन, वाक्य-विन्यास और अभिव्यक्ति की स्वाभाविकता जैसे पहलू अनुवाद-अध्ययन में महत्त्वपूर्ण हैं। पुस्तक का अध्ययन अनुवाद के विद्यार्थियों, हिंदी भाषा एवं साहित्य के शोधार्थियों और साहित्यिक अनुवाद में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी हो सकता है। यह अनुवाद को केवल भाषांतरण न मानकर भाषा और साहित्य के बीच एक रचनात्मक प्रक्रिया के रूप में समझने की दृष्टि प्रदान करती है।
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