Ghumakkad Shastra / Rahul Sankrityayan.
Language: Hindi Publication details: New Delhi: Radhakrishna Prakashan, 2026.Edition: 3rd edDescription: 158 pages; 21 cmISBN:- 9788119092345 ( Paperback)
- 910.4 SAN/G
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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Rajbhasha Book (Hindi)
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Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | RB | 910.4 SAN/G (Browse shelf(Opens below)) | Available | RB1628 |
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राहुल सांकृत्यायन की पुस्तक ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ में घुमक्कड़ी और यात्रा के महत्व को विस्तार से बताया गया है। लेखक के अनुसार यात्रा केवल मनोरंजन या एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, अनुभव और व्यक्तित्व-विकास का महत्वपूर्ण साधन है। घुमक्कड़ी से मनुष्य विभिन्न देशों, समाजों, संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकता है तथा उसकी सोच व्यापक और स्वतंत्र बनती है। सांकृत्यायन युवाओं को साहस, जिज्ञासा और आत्मनिर्भरता के साथ संसार को देखने और उससे सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके अनुसार सच्चा घुमक्कड़ जाति, धर्म, क्षेत्र और रूढ़ियों की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता को समझता है। इस प्रकार, घुमक्कड़ शास्त्र यात्रा को ज्ञान प्राप्ति, आत्म-विकास, स्वतंत्र चिंतन और व्यापक मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने का माध्यम मानने वाली एक प्रेरणादायक कृति है।
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