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Admi ka zahar / Shrilal Shukla.

आदमी का ज़हर / श्रीलाल शुक्ल. By: Language: Hindi Publication details: New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2023.Edition: 10th editionDescription: 144 pages ; 21 cmISBN:
  • 9788171786657 (paperback)
Subject(s): DDC classification:
  • 891.433 SHU/A
Summary: 'आदमी का ज़हर' श्रीलाल शुक्ल का एक रहस्यपूर्ण अपराध-कथा आधारित हिन्दी उपन्यास है। कथा की शुरुआत हरिश्चन्द्र नामक एक ईर्ष्यालु पति से होती है, जो अपनी पत्नी रूबी पर संदेह करता है और उसके एक परिचित की हत्या कर देता है। प्रारंभ में यह घटना एक सामान्य हत्या जैसी प्रतीत होती है, लेकिन शीघ्र ही इसके पीछे छिपे रहस्यों, अपराधों और षड्यंत्रों की परतें खुलने लगती हैं। पत्रकार उमाकान्त घटनाओं की तह तक पहुँचने का प्रयास करता है और उसके माध्यम से पाठक हत्या, संदेह, अपराध तथा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों की जटिल दुनिया से परिचित होता है। उपन्यास में पारंपरिक जासूसी कथा के रोमांच के साथ समकालीन समाज, मानवीय संदेह, अपराधबोध और नैतिक पतन का चित्रण किया गया है। यह रचना मनोरंजन के साथ-साथ पाठक को सामाजिक और मानवीय प्रश्नों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती है।
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Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.433 SHU/A (Browse shelf(Opens below)) Available RB1572
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Hindi crime and mystery novel.

'आदमी का ज़हर' श्रीलाल शुक्ल का एक रहस्यपूर्ण अपराध-कथा आधारित हिन्दी उपन्यास है। कथा की शुरुआत हरिश्चन्द्र नामक एक ईर्ष्यालु पति से होती है, जो अपनी पत्नी रूबी पर संदेह करता है और उसके एक परिचित की हत्या कर देता है। प्रारंभ में यह घटना एक सामान्य हत्या जैसी प्रतीत होती है, लेकिन शीघ्र ही इसके पीछे छिपे रहस्यों, अपराधों और षड्यंत्रों की परतें खुलने लगती हैं। पत्रकार उमाकान्त घटनाओं की तह तक पहुँचने का प्रयास करता है और उसके माध्यम से पाठक हत्या, संदेह, अपराध तथा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों की जटिल दुनिया से परिचित होता है। उपन्यास में पारंपरिक जासूसी कथा के रोमांच के साथ समकालीन समाज, मानवीय संदेह, अपराधबोध और नैतिक पतन का चित्रण किया गया है। यह रचना मनोरंजन के साथ-साथ पाठक को सामाजिक और मानवीय प्रश्नों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती है।

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