Rehan par ragghu / Kashinath Singh.
Language: Hindi Publication details: New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2025Description: 164 pages ; 21 cmISBN:- 9788126719648
- 891.433 SIN/R
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
Rajbhasha Book (Hindi)
|
Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | RB | 891.433 SIN/R (Browse shelf(Opens below)) | Available | RB1574 |
‘रेहन पर रग्घू’ काशीनाथ सिंह का प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसमें बदलते सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के बीच एक सामान्य व्यक्ति के संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है। उपन्यास का मुख्य पात्र रग्घू है, जो अपने परिवार की जिम्मेदारियों, आर्थिक परेशानियों और बदलते समय के दबावों से जूझता रहता है। वह अपने परिवार को एकजुट रखने और बच्चों का भविष्य सँवारने का प्रयास करता है, लेकिन समय के साथ परिवार के सदस्यों की सोच और प्राथमिकताएँ बदलने लगती हैं। नई पीढ़ी आधुनिक जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपने सपनों को अधिक महत्व देती है, जबकि रग्घू परंपरागत पारिवारिक मूल्यों और जिम्मेदारियों से बँधा रहता है। इसी कारण उसके जीवन में तनाव, अकेलापन और असुरक्षा बढ़ती जाती है। ‘रेहन पर’ शब्द रग्घू की उस स्थिति का प्रतीक है, जिसमें वह अपने जीवन, इच्छाओं और आत्मसम्मान तक को परिवार और परिस्थितियों के लिए दाँव पर लगा देता है। उपन्यास के माध्यम से लेखक ने परिवार के विघटन, पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी, आर्थिक संघर्ष, बदलती सामाजिक व्यवस्था और मनुष्य के अकेलेपन को संवेदनशील ढंग से चित्रित किया है। कुल मिलाकर, ‘रेहन पर रग्घू’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपने परिवार के लिए लगातार त्याग करता है, लेकिन बदलते समय में वही परिवार और सामाजिक परिस्थितियाँ उसे भीतर से अकेला कर देती हैं।
There are no comments on this title.