Parimal / Suryakant Tripathi.
Language: Hindi Publication details: Patna : Rajkamal Prakashan, 2024.Edition: 2nd edDescription: 266 p. : ill. ; 21.59 cmISBN:- 9788171782192 (pbk.)
- 891.431 TRI/P
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Rajbhasha Book (Hindi)
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Central Library, IIT Bhubaneswar | Central Library, IIT Bhubaneswar | RB | 891.431 TRI/P (Browse shelf(Opens below)) | Available | RB1528 |
Includes bibliographical references and index.
परिमल सूर्यकान्त त्रिपाठी श्निरालाश् का एक प्रसिद्ध काव्य संग्रह है जो छायावादी युग की उत्कृष्ट रचनाओं में गिना जाता है। इस संग्रह में भावुकता कल्पना रहस्य सौंदर्य और आत्माभिव्यक्ति की प्रधानता है। निराला ने परिमल में सामाजिक अन्याय आत्मसंघर्ष और व्यक्ति की आंतरिक पीड़ा को काव्यात्मक ढंग से व्यक्त किया है। कविताएँ नवजागरण विद्रोह और आध्यात्मिक चेतना का स्वर लिए हुए हैं। इसमें भाषा सहज लयात्मक और सजीव है जो पाठक को गहराई से छूती है। परिमल छायावाद की कोमलता के साथ.साथ यथार्थ और मानवतावाद का संतुलित रूप प्रस्तुत करता है। लेखक के बारे में: सूर्यकान्त त्रिपाठी श्निरालाश् (1899–1961) हिंदी छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे एक महान कविए उपन्यासकारए निबंधकार और अनुवादक थे जिनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना विद्रोहए करुणा और मानवता की गहराई मिलती है। उनकी प्रमुख काव्यकृतियाँ अनामिका परिमल कुकुरमुत्ता और गीतिका हैं जिनमें सरोज स्मृति और राम की शक्तिपूजा विशेष प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अप्सरा कुल्ली भाट सखी प्रबंध प्रतिमा जैसी विविध विधाओं में लेखन किया। उन्होंने रामायण महाभारत और विवेकानंद पर भी कार्य किया। निराला की भाषा शैली और दृष्टिकोण ने हिंदी साहित्य को एक नई चेतना और दिशा प्रदान की।
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