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Vanchit vargon ka samajsatra (Sociology of Minorities) / Manoj Rajguru, Sumitra Sharma, and Jyoti Gautam.

वंचित वर्गों का समाजशास्त्र (Sociology of Minorities) / मनोज राजगुरु, सुमित्रा शर्मा एवं ज्योति गौतम. By: Contributor(s): Language: Hindi Publication details: New Delhi : Rawat Publications, 2025.Description: 214 pages ; 22 cmISBN:
  • 9788131614631
Subject(s): DDC classification:
  • 305.568 RAJ/V
Summary: यह पुस्तक समाज के वंचित और हाशिए पर स्थित वर्गों के समाजशास्त्रीय अध्ययन पर केंद्रित है। इसमें सामाजिक असमानता, जाति, वर्ग, भेदभाव, सामाजिक बहिष्करण, अधिकारों तथा वंचित समुदायों की सामाजिक स्थिति जैसे विषयों का विवेचन होने की संभावना है। विविधता वाले भारतीय समाज में कई ऐसे वर्ग हैं, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से विभिन्न प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, और शैक्षिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है। अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला आदि को भारत में वंचित वर्ग की श्रेणी में सम्मिलित किया जा सकता है। संसाधनों की कमी के चलते इन्हें समाज में मुख्यधारा में शामिल होने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन वर्गों के प्रति होने वाले अन्याय और असमानता ने इन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा बनाया है। भारतीय समाज के प्रति समझ विकसित करने के लिए इन वंचित वर्गों की स्थिति और उनके सन्दर्भों को समझना भी आवश्यक है। इस संकलन में सम्मिलित 22 लेखों में तीन प्रमुख वंचित वर्गों - अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं से जुड़े विविध सन्दर्भों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
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Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 305.568 RAJ/V (Browse shelf(Opens below)) Available RB1678
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यह पुस्तक समाज के वंचित और हाशिए पर स्थित वर्गों के समाजशास्त्रीय अध्ययन पर केंद्रित है। इसमें सामाजिक असमानता, जाति, वर्ग, भेदभाव, सामाजिक बहिष्करण, अधिकारों तथा वंचित समुदायों की सामाजिक स्थिति जैसे विषयों का विवेचन होने की संभावना है। विविधता वाले भारतीय समाज में कई ऐसे वर्ग हैं, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से विभिन्न प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, और शैक्षिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है। अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला आदि को भारत में वंचित वर्ग की श्रेणी में सम्मिलित किया जा सकता है। संसाधनों की कमी के चलते इन्हें समाज में मुख्यधारा में शामिल होने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन वर्गों के प्रति होने वाले अन्याय और असमानता ने इन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा बनाया है। भारतीय समाज के प्रति समझ विकसित करने के लिए इन वंचित वर्गों की स्थिति और उनके सन्दर्भों को समझना भी आवश्यक है। इस संकलन में सम्मिलित 22 लेखों में तीन प्रमुख वंचित वर्गों - अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं से जुड़े विविध सन्दर्भों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

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