Hindi aur malayalam tulanatmaka sahitya : ek paricaya / P. G. Shashikala.
Language: Hindi Publication details: New Delhi : Vani Prakashan, 2026.Description: 34 pages ; 22 cmISBN:- 9789357759496 (paperback)
- 809 SHA/H
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Rajbhasha Book (Hindi)
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Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | RB | 809 SHA/H (Browse shelf(Opens below)) | Available | RB1662 |
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'हिन्दी और मलयालम तुलनात्मक साहित्य : एक परिचय' हिंदी और मलयालम साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन पर केंद्रित कृति है। इसमें दोनों भाषाओं की साहित्यिक परंपराओं, विकास-क्रम, प्रमुख प्रवृत्तियों तथा साहित्यिक अभिव्यक्ति के विभिन्न पक्षों का तुलनात्मक अध्ययन करने की आधारभूमि प्रस्तुत की जाती है। यह विषय दोनों भाषाओं के साहित्य में समानताओं, भिन्नताओं, सांस्कृतिक संदर्भों और साहित्यिक अंतर्संबंधों को समझने की दृष्टि प्रदान करता है। ‘हिन्दी और मलयालम तुलनात्मक साहित्य : एक परिचय’ तुलनात्मक साहित्य एक से अधिक भाषाओं में रचित साहित्य का अध्ययन है और तुलना इस अध्ययन का मुख्य अंग है। क्रोचे का कहना है कि 'तुलनात्मक साहित्य' एक स्वतन्त्र विद्यानुशासन बन ही नहीं सकता क्योंकि किसी भी साहित्यिक अध्ययन के लिए तुलना एक आवश्यक अंग है। दूसरे विद्वान भी कहते हैं कि साहित्य का अध्ययन करते हुए तुलना करने का मतलब सीधे साहित्य का अध्ययन करना ही है क्योंकि अरस्तू के समय से ही 'तुलनात्मकता' आलोचनात्मक व्यवहार का एक आवर्तक आयाम रहा है। चाहे एक भाषा में लिखित साहित्य का अध्ययन हो अथवा एक से अधिक भाषाओं में लिखित तुलनात्मक साहित्य का अध्ययन हो, दोनों ही स्थितियों में अध्ययन का केन्द्रीय विषय साहित्य ही है और इसीलिए तुलनात्मक साहित्य को किसी एक भाषा में लिखित साहित्य के अध्ययन से अलग नहीं किया जा सकता। यह सच है कि कोई भी आलोचक किसी भी लेखक की कृति में निहित विशिष्ट प्रवृत्ति को उभारने के लिए अनायास ही एवं स्वचालित रूप में अन्य किसी तुलनीय कृति के साथ उसकी तुलना करता है मगर तुलनात्मक आलोचक के लिए यह काम सचेतन रूप से होता है। वह तुलनात्मक पद्धति का प्रयोग करता हुआ कृतियों में निहित उनकी विशिष्टताओं को प्रकाश में लाता है।
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