Charitrahin / Saratchandra Chattopadhyay.
Language: Hindi Publication details: New Delhi : Radhakrishna Prakashan, 2026.Description: 408 Pages ; 22 cmISBN:- 9788183614238 (paperback)
- 891.433 CHA/C
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Rajbhasha Book (Hindi)
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Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section | RB | 891.433 CHA/C (Browse shelf(Opens below)) | Available | RB1648 |
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| 891.433 CHA/A Anandmath / | 891.433 CHA/B Brahman ki beti / | 891.433 CHA/B Badi didi/ | 891.433 CHA/C Charitrahin / | 891.433 CHA/C Chandranath / | 891.433 CHA/D Devdaas / 880-02 | 891.433 CHA/D Devdasi / |
'चरित्रहीन' शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध बंगाली उपन्यास का हिंदी अनुवाद है। इस उपन्यास में नारी का शोषण, समर्पण और भाव-जगत तथा पुरुष समाज में उसका चारित्रिक मूल्यांकन—और इससे उभरनेवाला अन्तर्विरोध ही इस उपन्यास का केन्द्रबिन्दु है। शरतचन्द्र ने नारी-मन के साथ-साथ इस उपन्यास में मानव-मन की सूक्ष्म प्रवृत्तियों का भी मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है, साथ ही यह उपन्यास नारी की परम्परावादी छवि को तोडऩे का भी सफल प्रयास करता है। उपन्यास सवाल उठाता है कि देवी की तरह पूजनीय और दासी की तरह पितृसत्ता के अधीन घुट-घुटकर जीनेवाली स्त्री के साथ यह अन्तर्विरोध और विडम्बना क्यों है? उपन्यास ‘चरित्र’ की अवधारणा को भी पुन: परिभाषित करता है। चरित्र को स्त्री के साथ ही अनिवार्य गुण की तरह क्यों जोड़ा जाता है? वह कैसे चरित्रहीन हो जाती है? उसे चरित्रहीन कहनेवाला कौन होता है? यह प्रसिद्ध उपन्यास बार-बार हमें इन सवालों के सामने ला खड़ा करता है। नारी-भावनाओं को अभिव्यक्त करने में दक्ष शरत् बाबू इस उपन्यास में उस परिवर्तन को भी रेखांकित करते हैं जो समाज में आया है। इसलिए दशकों पहले लिखा गया यह उपन्यास आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उल्लेखनीय है कि इस उपन्यास का अनुवाद नए सिरे से किया गया है, उन तमाम अंशों को साथ रखते हुए जो अभी तक उपलब्ध अनुवादों में छोड़ दिए गए थे। एक सम्पूर्ण उत्कृष्ट उपन्यास।
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