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Mahasamar : antaral-5 / Narendra Kohli.

महासमर : अन्तराल-5 / नरेंद्र कोहली. By: Language: Hindi Series: Mahāsamar ; v5Publication details: New Delhi : Vani Prakashan, 2012.Description: 296 pages ; 22 cmISBN:
  • 9789352291878 (hardback)
Subject(s): DDC classification:
  • 891.433 KOH/M
Summary: 'महासमर : अन्तराल-5' नरेंद्र कोहली के 'महासमर' उपन्यास-क्रम का पाँचवाँ खंड है। महाभारत की कथा को आधुनिक उपन्यासात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करने वाली यह कृति पात्रों के जीवन, संबंधों, दायित्वों और सत्ता-संघर्ष से जुड़े प्रसंगों को सामने लाती है। इसमें पारिवारिक तथा राजनीतिक परिस्थितियों, मानवीय महत्वाकांक्षाओं, नैतिक दुविधाओं और बदलती परिस्थितियों के बीच पात्रों के निर्णयों जैसे विषयों को कथात्मक रूप में समझने का अवसर मिलता है। लेखक पौराणिक कथा-संसार के माध्यम से मानवीय व्यवहार, कर्तव्य, अधिकार और जीवन-मूल्यों पर विचार प्रस्तुत करते हैं। यह खंड 'महासमर' की विस्तृत कथा-यात्रा का हिस्सा है और महाभारत के प्रसंगों को साहित्यिक तथा मनोवैज्ञानिक दृष्टि से पढ़ने में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है।
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Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.433 KOH/M (Browse shelf(Opens below)) Available RB1630
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Fifth part of the Mahāsamar novel series.

'महासमर : अन्तराल-5' नरेंद्र कोहली के 'महासमर' उपन्यास-क्रम का पाँचवाँ खंड है। महाभारत की कथा को आधुनिक उपन्यासात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करने वाली यह कृति पात्रों के जीवन, संबंधों, दायित्वों और सत्ता-संघर्ष से जुड़े प्रसंगों को सामने लाती है। इसमें पारिवारिक तथा राजनीतिक परिस्थितियों, मानवीय महत्वाकांक्षाओं, नैतिक दुविधाओं और बदलती परिस्थितियों के बीच पात्रों के निर्णयों जैसे विषयों को कथात्मक रूप में समझने का अवसर मिलता है। लेखक पौराणिक कथा-संसार के माध्यम से मानवीय व्यवहार, कर्तव्य, अधिकार और जीवन-मूल्यों पर विचार प्रस्तुत करते हैं। यह खंड 'महासमर' की विस्तृत कथा-यात्रा का हिस्सा है और महाभारत के प्रसंगों को साहित्यिक तथा मनोवैज्ञानिक दृष्टि से पढ़ने में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है।

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