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Urdu ke pratinidhi shayar aur unki shayari / edited by Vashishth Anoop.

उर्दू के प्रतिनिधि शायर और उनकी शायरी / संपादक वशिष्ट अनूप. Contributor(s): Language: Hindi Publication details: New Delhi : Vani Prakashan; 2025.Description: 192 pages ; 22 cmISBN:
  • 9789369441518 (paperback)
Subject(s): DDC classification:
  • 891.4391 ANO/U
Summary: यह पुस्तक उर्दू के प्रतिनिधि शायरों, उनकी काव्य-परंपरा और साहित्यिक योगदान का परिचय प्रस्तुत करती है। इसमें उर्दू शायरी की प्रमुख प्रवृत्तियों, विभिन्न शायरों की रचनात्मक विशेषताओं तथा उनकी शायरी में अभिव्यक्त सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय संवेदनाओं के अध्ययन पर केंद्रित सामग्री शामिल है। यह पुस्तक उर्दू कविता के इतिहास, विकास और आलोचनात्मक अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा साहित्यप्रेमियों के लिए उपयोगी है। उर्दू शायरी में एक ख़ास तरह की कशिश होती है जो सुनने या पढ़ने वालों को सहज ही आकर्षित कर लेती है। इसके एक-एक शेर में एक-एक कहानी भरी होती है। संक्षिप्तता, सारगर्भिता और तत्काल प्रभावोत्पादकता इसकी निजी ख़ासियत है। इधर यह देखा जा रहा है कि नयी पीढ़ी उर्दू शायरी के प्रति अधिक उत्सुक हुई है। कक्षाओं में किसी शायर के एक शेर की चर्चा कर देने पर विद्यार्थी उसके संग्रह की तलाश में लग जाते हैं। इधर एक बात और हुई है कि उर्दू अदीबों की पुस्तकें उर्दू की तुलना में हिन्दी में अधिक पढ़ी जा रही हैं। उर्दू के कई साहित्यकारों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके साहित्य के पाठक हिन्दी में अधिक हैं। कुछ ने तो यहाँ तक कहा है कि उनका साहित्य हिन्दी में ही जीवित रहेगा। इधर सुखद बात यह है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाओं में उर्दू साहित्य का इतिहास और उर्दू के कई श्रेष्ठ शायरों की कविताएँ पढ़ायी जा रही हैं। ऐसा कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी हो रहा है। ऐसे में उर्दू-कवियों के एक ऐसे संग्रह की महती आवश्यकता अनुभव हो रही थी, जिसमें एक साथ उर्दू के श्रेष्ठ शायरों की प्रतिनिधि शायरी संकलित हो। यह संग्रह इस दिशा में एक सार्थक और ज़रूरी पहल है। इस संकलन में उर्दू के 18 शायरों का परिचय और उनकी चुनी हुई कविताएँ दी जा रही हैं। यह सूची और बढ़ायी जा सकती थी लेकिन ऐसा करने पर यह पुस्तक काफ़ी भारी-भरकम हो जाती। इसके आगामी संस्करण में कुछ और कवियों को शामिल किया जा सकता है। मुझे उम्मीद है कि उर्दू कविता का यह संग्रह हिन्दी के जिज्ञासु व जागरूक विद्यार्थियों, विद्वानों और साहित्य-प्रेमियों द्वारा समादृत होकर उनका ज्ञानवर्धन करेगा।
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Edited by Vashishth Anoop.

यह पुस्तक उर्दू के प्रतिनिधि शायरों, उनकी काव्य-परंपरा और साहित्यिक योगदान का परिचय प्रस्तुत करती है। इसमें उर्दू शायरी की प्रमुख प्रवृत्तियों, विभिन्न शायरों की रचनात्मक विशेषताओं तथा उनकी शायरी में अभिव्यक्त सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय संवेदनाओं के अध्ययन पर केंद्रित सामग्री शामिल है। यह पुस्तक उर्दू कविता के इतिहास, विकास और आलोचनात्मक अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा साहित्यप्रेमियों के लिए उपयोगी है। उर्दू शायरी में एक ख़ास तरह की कशिश होती है जो सुनने या पढ़ने वालों को सहज ही आकर्षित कर लेती है। इसके एक-एक शेर में एक-एक कहानी भरी होती है। संक्षिप्तता, सारगर्भिता और तत्काल प्रभावोत्पादकता इसकी निजी ख़ासियत है। इधर यह देखा जा रहा है कि नयी पीढ़ी उर्दू शायरी के प्रति अधिक उत्सुक हुई है। कक्षाओं में किसी शायर के एक शेर की चर्चा कर देने पर विद्यार्थी उसके संग्रह की तलाश में लग जाते हैं। इधर एक बात और हुई है कि उर्दू अदीबों की पुस्तकें उर्दू की तुलना में हिन्दी में अधिक पढ़ी जा रही हैं। उर्दू के कई साहित्यकारों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके साहित्य के पाठक हिन्दी में अधिक हैं। कुछ ने तो यहाँ तक कहा है कि उनका साहित्य हिन्दी में ही जीवित रहेगा। इधर सुखद बात यह है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाओं में उर्दू साहित्य का इतिहास और उर्दू के कई श्रेष्ठ शायरों की कविताएँ पढ़ायी जा रही हैं। ऐसा कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी हो रहा है। ऐसे में उर्दू-कवियों के एक ऐसे संग्रह की महती आवश्यकता अनुभव हो रही थी, जिसमें एक साथ उर्दू के श्रेष्ठ शायरों की प्रतिनिधि शायरी संकलित हो। यह संग्रह इस दिशा में एक सार्थक और ज़रूरी पहल है। इस संकलन में उर्दू के 18 शायरों का परिचय और उनकी चुनी हुई कविताएँ दी जा रही हैं। यह सूची और बढ़ायी जा सकती थी लेकिन ऐसा करने पर यह पुस्तक काफ़ी भारी-भरकम हो जाती। इसके आगामी संस्करण में कुछ और कवियों को शामिल किया जा सकता है। मुझे उम्मीद है कि उर्दू कविता का यह संग्रह हिन्दी के जिज्ञासु व जागरूक विद्यार्थियों, विद्वानों और साहित्य-प्रेमियों द्वारा समादृत होकर उनका ज्ञानवर्धन करेगा।

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