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Rag bhopali / Sharad Joshi.

राग भोपाली / शरद जोशी. By: Language: Hindi Publication details: New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2025.Edition: 2nd editionDescription: 316 pages ; 21 cmISBN:
  • 9789360868710
Subject(s): DDC classification:
  • 891.434 JOS/R
Summary: राग भोपाली शरद जोशी के व्यंग्य-लेखों का संग्रह है। इसमें लेखक ने सामाजिक जीवन, राजनीति, प्रशासन, मध्यवर्गीय मानसिकता और मानवीय व्यवहार में दिखाई देने वाली विसंगतियों को हास्य तथा तीखे व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया है। रोजमर्रा की साधारण घटनाओं और परिस्थितियों को आधार बनाकर वे उनमें छिपे पाखंड, दिखावे, अव्यवस्था और सामाजिक विरोधाभासों को उजागर करते हैं। शरद जोशी का व्यंग्य केवल पाठक को हँसाने का माध्यम नहीं है, बल्कि वह समाज और व्यवस्था की वास्तविकताओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करता है। उनकी भाषा सहज, चुटीली और प्रभावशाली है तथा उसमें हास्य के साथ गहरी सामाजिक आलोचना दिखाई देती है। राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था, बदलते सामाजिक मूल्य तथा मध्यवर्गीय जीवन की मानसिकता पर लेखक की सूक्ष्म दृष्टि इस संग्रह को विशेष बनाती है। हास्य, विडंबना, सामाजिक आलोचना और मानवीय व्यवहार का सूक्ष्म निरीक्षण इस कृति की प्रमुख विशेषताएँ हैं। यह संग्रह शरद जोशी की विशिष्ट व्यंग्य-शैली और सामाजिक सरोकारों का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व करता है।
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Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.434 JOS/R (Browse shelf(Opens below)) Available RB1610
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Collection of Hindi satirical essays.

राग भोपाली शरद जोशी के व्यंग्य-लेखों का संग्रह है। इसमें लेखक ने सामाजिक जीवन, राजनीति, प्रशासन, मध्यवर्गीय मानसिकता और मानवीय व्यवहार में दिखाई देने वाली विसंगतियों को हास्य तथा तीखे व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया है। रोजमर्रा की साधारण घटनाओं और परिस्थितियों को आधार बनाकर वे उनमें छिपे पाखंड, दिखावे, अव्यवस्था और सामाजिक विरोधाभासों को उजागर करते हैं। शरद जोशी का व्यंग्य केवल पाठक को हँसाने का माध्यम नहीं है, बल्कि वह समाज और व्यवस्था की वास्तविकताओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करता है। उनकी भाषा सहज, चुटीली और प्रभावशाली है तथा उसमें हास्य के साथ गहरी सामाजिक आलोचना दिखाई देती है। राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था, बदलते सामाजिक मूल्य तथा मध्यवर्गीय जीवन की मानसिकता पर लेखक की सूक्ष्म दृष्टि इस संग्रह को विशेष बनाती है। हास्य, विडंबना, सामाजिक आलोचना और मानवीय व्यवहार का सूक्ष्म निरीक्षण इस कृति की प्रमुख विशेषताएँ हैं। यह संग्रह शरद जोशी की विशिष्ट व्यंग्य-शैली और सामाजिक सरोकारों का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व करता है।

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