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Nadi me khada kavi / Sharad Joshi.

नदी में खड़ा कवि / शरद जोशी. By: Language: Hindi Publication details: New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2021.Description: 215 pages ; 21 cmISBN:
  • 9789390971831 (paperback)
Subject(s): DDC classification:
  • 891.434 JOS/N
Summary: नदी में खड़ा कवि शरद जोशी के चर्चित व्यंग्य-लेखों का संग्रह है। इसमें लेखक ने सामाजिक जीवन, राजनीति, प्रशासन, पाखंड, भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और मानवीय व्यवहार की विसंगतियों को हास्य और तीखी आलोचनात्मक दृष्टि के साथ प्रस्तुत किया है। सामान्य जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं और परिस्थितियों को आधार बनाकर शरद जोशी उनके भीतर छिपी विडंबनाओं को उजागर करते हैं। उनकी भाषा सहज, चुटीली और प्रभावशाली है, जिसमें मनोरंजन के साथ गंभीर सामाजिक सरोकार भी जुड़े हुए हैं। संग्रह के व्यंग्य पाठक को केवल हँसाते नहीं, बल्कि अपने आसपास की व्यवस्था, सामाजिक व्यवहार और सार्वजनिक जीवन पर सोचने के लिए भी प्रेरित करते हैं। पाखंड, दिखावा, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता और प्रशासनिक विसंगतियों पर लेखक का व्यंग्य विशेष रूप से प्रभावशाली है। हास्य और सामाजिक आलोचना का संतुलन इस संग्रह की प्रमुख विशेषता है। यह कृति शरद जोशी की विशिष्ट व्यंग्य-दृष्टि, भाषा-शिल्प और सामाजिक चेतना का प्रतिनिधित्व करती है।
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Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.434 JOS/N (Browse shelf(Opens below)) Available RB1609
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Collection of Hindi satirical essays.

नदी में खड़ा कवि शरद जोशी के चर्चित व्यंग्य-लेखों का संग्रह है। इसमें लेखक ने सामाजिक जीवन, राजनीति, प्रशासन, पाखंड, भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और मानवीय व्यवहार की विसंगतियों को हास्य और तीखी आलोचनात्मक दृष्टि के साथ प्रस्तुत किया है। सामान्य जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं और परिस्थितियों को आधार बनाकर शरद जोशी उनके भीतर छिपी विडंबनाओं को उजागर करते हैं। उनकी भाषा सहज, चुटीली और प्रभावशाली है, जिसमें मनोरंजन के साथ गंभीर सामाजिक सरोकार भी जुड़े हुए हैं। संग्रह के व्यंग्य पाठक को केवल हँसाते नहीं, बल्कि अपने आसपास की व्यवस्था, सामाजिक व्यवहार और सार्वजनिक जीवन पर सोचने के लिए भी प्रेरित करते हैं। पाखंड, दिखावा, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता और प्रशासनिक विसंगतियों पर लेखक का व्यंग्य विशेष रूप से प्रभावशाली है। हास्य और सामाजिक आलोचना का संतुलन इस संग्रह की प्रमुख विशेषता है। यह कृति शरद जोशी की विशिष्ट व्यंग्य-दृष्टि, भाषा-शिल्प और सामाजिक चेतना का प्रतिनिधित्व करती है।

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