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Ako bako / Divya Prakash Dube.

आको-बाको / दिव्य प्रकाश दुबे. By: Language: Hindi Publication details: Noida : Hind Yugm, 2021.Description: 21 cmISBN:
  • 9789392820007
Subject(s): DDC classification:
  • 891.433 DUB/A
Summary: 'आको-बाको' दिव्य प्रकाश दुबे का समकालीन हिन्दी कहानी-संग्रह है, जिसमें आधुनिक शहरी जीवन, प्रेम, दोस्ती, परिवार, नौकरी, स्मृतियों और रोजमर्रा के छोटे-छोटे अनुभवों को सरल, सहज और संवादात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। संग्रह की कहानियों में सामान्य जीवन जीने वाले लोगों की भावनाएँ, उनकी आकांक्षाएँ, रिश्तों की जटिलताएँ और बदलते सामाजिक परिवेश के प्रभाव दिखाई देते हैं। लेखक बड़ी घटनाओं के बजाय जीवन की छोटी परिस्थितियों और साधारण क्षणों में छिपी मानवीय संवेदनाओं को महत्व देते हैं। प्रेम और मित्रता के साथ-साथ अकेलापन, पुरानी यादें, परिवार के प्रति लगाव, कामकाजी जीवन और आधुनिक शहरों की भागदौड़ जैसी स्थितियाँ कहानियों को समकालीन जीवन से जोड़ती हैं। सहज भाषा, हास्य, आत्मीयता और भावनात्मक संवेदना के कारण यह संग्रह आधुनिक मध्यमवर्गीय जीवन के अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है।
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Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.433 DUB/A (Browse shelf(Opens below)) Available RB1599
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Collection of Hindi short stories.

'आको-बाको' दिव्य प्रकाश दुबे का समकालीन हिन्दी कहानी-संग्रह है, जिसमें आधुनिक शहरी जीवन, प्रेम, दोस्ती, परिवार, नौकरी, स्मृतियों और रोजमर्रा के छोटे-छोटे अनुभवों को सरल, सहज और संवादात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। संग्रह की कहानियों में सामान्य जीवन जीने वाले लोगों की भावनाएँ, उनकी आकांक्षाएँ, रिश्तों की जटिलताएँ और बदलते सामाजिक परिवेश के प्रभाव दिखाई देते हैं। लेखक बड़ी घटनाओं के बजाय जीवन की छोटी परिस्थितियों और साधारण क्षणों में छिपी मानवीय संवेदनाओं को महत्व देते हैं। प्रेम और मित्रता के साथ-साथ अकेलापन, पुरानी यादें, परिवार के प्रति लगाव, कामकाजी जीवन और आधुनिक शहरों की भागदौड़ जैसी स्थितियाँ कहानियों को समकालीन जीवन से जोड़ती हैं। सहज भाषा, हास्य, आत्मीयता और भावनात्मक संवेदना के कारण यह संग्रह आधुनिक मध्यमवर्गीय जीवन के अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है।

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