Image from Google Jackets

Visvaguru / Nilotpal Mrinal.

विश्वगुरु / नीलोत्पल मृणाल. By: Language: Hindi Publication details: Noida : Hind Yugm, 2026.Description: 448 pages ; 22 cmISBN:
  • 9788119555543 (paperback)
Subject(s): DDC classification:
  • 891.433 MRI/V
Summary: 'विश्वगुरु' नीलोत्पल मृणाल का समकालीन भारतीय समाज और युवा जीवन पर केंद्रित हिन्दी उपन्यास है। कथा में ग्रामीण और कस्बाई भारत से आने वाले युवाओं के सपनों, शिक्षा, रोजगार, अवसरों और सामाजिक संघर्षों को सत्ता तथा राजनीति की जटिल संरचनाओं के साथ जोड़ा गया है। चिन्मय, दर्पण, अंगद, कृपालु और लावण्या जैसे पात्र उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र, शिक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में संघर्ष कर रही है। उपन्यास में बेरोजगारी, दहेज, पारिवारिक संकट, जाति, धर्म, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के नैतिक संकट जैसे प्रश्नों को यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। दूसरी ओर, सत्ता, हिंसा और धन के गठजोड़ से जुड़े पात्र सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की दूसरी तस्वीर सामने लाते हैं। लेखक किसी एक विचारधारा या राजनीतिक पक्ष का समर्थन करने के बजाय समकालीन भारत के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक यथार्थ को अनेक पात्रों और परिस्थितियों के माध्यम से सामने रखते हैं। यह उपन्यास युवा आकांक्षाओं, अवसरों की असमानता, सामाजिक परिवर्तन और सत्ता-संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण साहित्यिक प्रयास है।
Tags from this library: No tags from this library for this title. Log in to add tags.
Star ratings
    Average rating: 0.0 (0 votes)
Holdings
Cover image Item type Current library Home library Collection Shelving location Call number Materials specified Vol info URL Copy number Status Notes Date due Barcode Item holds Item hold queue priority Course reserves
Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.433 MRI/V (Browse shelf(Opens below)) Available RB1595
Total holds: 0

Hindi novel.

'विश्वगुरु' नीलोत्पल मृणाल का समकालीन भारतीय समाज और युवा जीवन पर केंद्रित हिन्दी उपन्यास है। कथा में ग्रामीण और कस्बाई भारत से आने वाले युवाओं के सपनों, शिक्षा, रोजगार, अवसरों और सामाजिक संघर्षों को सत्ता तथा राजनीति की जटिल संरचनाओं के साथ जोड़ा गया है। चिन्मय, दर्पण, अंगद, कृपालु और लावण्या जैसे पात्र उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र, शिक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में संघर्ष कर रही है। उपन्यास में बेरोजगारी, दहेज, पारिवारिक संकट, जाति, धर्म, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के नैतिक संकट जैसे प्रश्नों को यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। दूसरी ओर, सत्ता, हिंसा और धन के गठजोड़ से जुड़े पात्र सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की दूसरी तस्वीर सामने लाते हैं। लेखक किसी एक विचारधारा या राजनीतिक पक्ष का समर्थन करने के बजाय समकालीन भारत के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक यथार्थ को अनेक पात्रों और परिस्थितियों के माध्यम से सामने रखते हैं। यह उपन्यास युवा आकांक्षाओं, अवसरों की असमानता, सामाजिक परिवर्तन और सत्ता-संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण साहित्यिक प्रयास है।

There are no comments on this title.

to post a comment.
📊 Library Statistics
📚
0
Books
💻
0
E-Books
📰
0
E-Journals
🎓
0
Theses
📖
0
E-Theses & Dissertations
📰
0
E-Magazines & Newspapers
🗄️
0
E-Databases
👥
0
Users