Katha satisar / (Record no. 14937)

MARC details
000 -LEADER
fixed length control field 05047 a2200241 4500
001 - CONTROL NUMBER
control field RB1446
003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER
control field IN-BhIIT
005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION
control field 20250808152310.0
008 - FIXED-LENGTH DATA ELEMENTS--GENERAL INFORMATION
fixed length control field 250808b |||||||| |||| 00| 0 eng d
020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
ISBN 9788126713615 (pbk.)
040 ## - CATALOGING SOURCE
Original cataloging agency IN-BhIIT
041 ## - LANGUAGE CODE
Language code of text hin
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number 891.433
Book number CHA/K
100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME
Personal name Chandrakanta
Relator term Author
245 ## - TITLE STATEMENT
Linkage 880-02
Title Katha satisar /
Statement of responsibility, etc Chandrakanta.
250 ## - EDITION STATEMENT
Edition statement 3rd ed.
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT)
Place of publication New Delhi :
Name of publisher Rajkamal Prakashan,
Year of publication 2021.
300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION
Number of Pages 594 p. :
Dimensions(size) 20 cm.
520 ## - SUMMARY, ETC.
Summary, etc शैव, बौद्ध और इस्लाम की साँझी विरासतों से रची कश्मीर वादी में पहले भी कई कठिन दौर आ चुके हैं । कभी औरंगजेब के समय, तो कभी अफगान-काल में । लेकिन वे दौर आकर गुजर गए । कभी धर्म की रक्षा के लिए, गुरु तेगबहादुर मसीहा बनकर आए, कभी कोई और । तभी ललद्यद और नुन्दऋषि की धरती पर लोग, भिन्न धर्मों के बावजूद, आपसी सौहार्द और समन्वय की लोक-संस्कृति में रचे-बसे जीते रहे! आज वही आतंक, हत्या और निष्कासन का कठिन सिकन्दरी दौर फिर आ गया है, तब सिकंदर के आतंक से वादी में पंडितों के कुल ग्यारह घर बचे रह गए थे । गो कि नई शक्ल में नए कारणों के साथ, पर व्यथा-कथा वही है-मानवीय यन्त्रणा और त्रास की चिरन्तन दुख-गाथा! लोकतन्त्र के इस गरिमामय समय में, स्वर्ग को नरक बनाने के लिए कौन जिम्मेदार हैं? छोटे-बड़े नेताओं, शासकों, बिचौलियों की कौन-सी महत्त्वाकांक्षाओं, कैसी भूलों, असावधानियों और ढुलमुल नीतियों का परिणाम है-आज का रक्त-रँगा कश्मीर? पाकिस्तान तो आतंकवाद के लिए जिम्मेदार है ही, पर हमारे नेतागण समय रहते चेत क्यों न गए? ऐसा क्यों हुआ कि जो औसत कश्मीरी, गुस्से में, ज्यादा-से-ज्यादा, एक-दूसरे पर काँगड़ी उछाल देता था, वही कलिशनिकोव और एके, सैंतालीसों से अपने ही हमवतनों के खून से हाथ रँगने लगा? ऐलान गली जिन्दा है तथा यहाँ वितस्ता बहती है के बाद कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया चर्चित लेखिका चन्द्रकान्ता का बृहद् उपन्यास है-कथा सतीसर लेखिका ने अपने इस नवीनतम उपन्यास में पात्रों के माध्यम से मानवीय अधिकार और अस्मिता से जुड़े प्रश्नों को उठाया है । इस पुस्तक में सन् 1931 से लेकर 2000 के शुरुआती समय के बीच बनते-बिगड़ते कश्मीर की कथा को संवेदना का ऐसा पुट दिया गया है कि सारे पात्र सजीव हो उठते हैं । सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में घटे हादसों से जनजीवन के आपसी रिश्तों पर पड़े प्रभावों का संवेदनात्मक परीक्षण ही नहीं है यह पुस्तक, वर्तमान के जवाबदेह तथ्यों को साहित्य में दर्ज करने से एक ऐतिहासिक दस्तावेज भी बन गई है ।
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term Hindi novel
880 ## - ALTERNATE GRAPHIC REPRESENTATION
Linkage 100-01
Title in other language कथा सतीसार /
SoR in other language चंद्रकांत के द्वारा।
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Koha item type Rajbhasha Book (Hindi)
Holdings
Withdrawn status Lost status Damaged status Not for loan Collection code Home library Current library Date acquired Source of acquisition Cost, normal purchase price Full call number Accession Number Cost, replacement price Price effective from Koha item type
Not withdrawn Not Lost not damaged   RB Central Library, IIT Bhubaneswar Central Library, IIT Bhubaneswar 05/03/2025 52 594.15 891.433 CHA/K RB1446 699.00 05/03/2025 Rajbhasha Book (Hindi)

Central Library, Indian Institute of Technology Bhubaneswar, 4th Floor, Administrative Building, Argul, Khordha, PIN-752050, Odisha, India
Phone: +91-674-7138750 | Email: circulation.library@iitbbs.ac.in (For circulation related queries),
Email: info.library@iitbbs.ac.in (For other queries)