Apne samne / (Record no. 14871)
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| fixed length control field | 05113 a2200241 4500 |
| 001 - CONTROL NUMBER | |
| control field | RB1464 |
| 003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER | |
| control field | IN-BhIIT |
| 005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION | |
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| 008 - FIXED-LENGTH DATA ELEMENTS--GENERAL INFORMATION | |
| fixed length control field | 250808b |||||||| |||| 00| 0 eng d |
| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 9788126705627 (hbk.) |
| 040 ## - CATALOGING SOURCE | |
| Original cataloging agency | IN-BhIIT |
| 041 ## - LANGUAGE CODE | |
| Language code of text | eng |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | 891.431 |
| Book number | KUN/A |
| 100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | Narain, Kunwar |
| Relator term | Author |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Linkage | 880-02 |
| Title | Apne samne / |
| Statement of responsibility, etc | Kunwar Narain. |
| 250 ## - EDITION STATEMENT | |
| Edition statement | 13th ed. |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | New Delhi : |
| Name of publisher | Rajkamal Prakashan, |
| Year of publication | 2023. |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 109 p. : |
| Dimensions(size) | 20 cm. |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | कुंवर नारायण कायह कविता-संग्रह एक लम्बे समय कें बाद आ रहा है । ' आत्मजयी' के बाद की ये कविताएँ रचनाकाल की दृष्टि से किसी एक ही समय की नहीं हैं; इसलिए एक तर चर की भी नहीं हैं । विविधता वैसे भी उनकी विशिष्टता है क्योंकि जीवन को अनुभूति और चिन्तन के विभिन्न धरातलों पर ग्रहण करनेवाले कवि कुंवर नारायण अपनी कविताओं में सीमाएँ' नहीं बनाते; उनकी ज्यादातर कविताएँ किसी एक ही तरह की भाषा या विषय में विसर्जित-सी हो गयी नहीं लगतीं -दोनो को विस्तृत करती लगती हैं । अनेक कविताएँ मानो समाप्त नहीं होती, एक खास तरह हमारी बेचैनियों का हिस्सा बन जाती हैं । इस तरह से देखें तो वे अपने को सिद्ध करनेवाले कवि हमें नहीं नजर आते । वे बराबर अपनी कविताओं में मुहावरों से बचते हैं और अपने ढंग से उनसे लड़ते भी हैं । उनकी कविता की भाषा में धोखे नहीं हैं । अधिकांश कविताओं का पैनापन जिन्दगी के कई हिस्सों को बिल्कुल नये ढंग से छूता है । वे मानते हैं कि दैनिक यथार्थ के साथ कविता का रिश्ता नजूदीक का भी हो सकता है और दूर का भी और दोनों ही तरह वह जीवन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है-सवाल है कविता कितने सच्चे और उदार अर्थों में हमें आदमी बनाने की ताकत रखती है । कविता उनके लिए जीवन का प्रतिबिम्ब मात्र नहीं, जीवन का सबसे आत्मीय प्रसंग है-कविता, जो अपने चारों तरफ भी देखती है और अपने को सामने रखकर भी । उनकी कविताओं में हमें बहुत सतर्क किस्म की भाषा का इस्तेमाल मिलता है; वह कभी बहुत गहराई से किसी ऐतिहासिक या दाशनिक अनुभव की तहों में चली जाती है और कभी इतनी सरल दिखती है कि वह हमें अपने बहुत क़रीब नजर आती है । बहुआयामी स्तरों पर भाषा से यह लड़ाई और प्यार कुंवर नारायण को चुनौती देता है, खासतौर पर एक ऐसे वक्त में जब कविता का एक बड़ा हिस्सा एक ही तरह की भाषा में अपने को अभिव्यक्त किये चला जा रहा है । हिन्दी के अग्रणी आधुनिक कवि कुंवर नारायण की कविता को दुनिया में जाने का मतलब जिन्दगी को गहराई और विस्तार से देखने और जानने का अच्छा मौका पा लेना है । |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | Hindi poetry |
| 880 ## - ALTERNATE GRAPHIC REPRESENTATION | |
| Linkage | 100-01 |
| Title in other language | अपने सामने : |
| SoR in other language | कुंवर नारायण के द्वारा। |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Koha item type | Rajbhasha Book (Hindi) |
| Koha issues (borrowed), all copies | 1 |
| Withdrawn status | Lost status | Damaged status | Not for loan | Collection code | Home library | Current library | Date acquired | Source of acquisition | Cost, normal purchase price | Full call number | Accession Number | Cost, replacement price | Price effective from | Koha item type |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Not withdrawn | Not Lost | not damaged | RB | Central Library, IIT Bhubaneswar | Central Library, IIT Bhubaneswar | 07/03/2025 | 51 | 335.75 | 891.431 NAR/A | RB1464 | 395.00 | 07/03/2025 | Rajbhasha Book (Hindi) |