Sara akash/

Yadav, Rajendra

Sara akash/ Rajendra Yadav - 13th ed - New Delhi: Rajkamal Prakashan, 2025. - 207 pages; 21 cm.

Hindi novel.

राजेन्द्र यादव का उपन्यास सारा आकाश भारतीय मध्यवर्गीय परिवार और वैवाहिक जीवन की जटिलताओं को केंद्र में रखकर लिखा गया है। कहानी का मुख्य पात्र समर एक युवा है, जो अपने आदर्शों, सपनों और स्वतंत्र जीवन की आकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ना चाहता है। उसका विवाह प्रभा से होता है, लेकिन विवाह के बाद दोनों के बीच भावनात्मक दूरी, संकोच, अहं और पारिवारिक दबाव के कारण संबंधों में तनाव पैदा हो जाता है। संयुक्त परिवार का वातावरण, सामाजिक रूढ़ियाँ और आर्थिक सीमाएँ उनके वैवाहिक जीवन को और कठिन बना देती हैं। समर अपने व्यक्तिगत आदर्शों और वास्तविक जीवन की जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष करता है, जबकि प्रभा भी अपने अस्तित्व और भावनाओं के लिए संघर्ष करती है। उपन्यास के माध्यम से लेखक ने मध्यवर्गीय समाज, दांपत्य जीवन, पारिवारिक दबाव, स्त्री-पुरुष संबंध और युवा पीढ़ी के सपनों तथा यथार्थ के बीच के संघर्ष को संवेदनशील एवं यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया है।

9788183612531 (Paperback)


Hindi fiction
Middle class life --fiction
Human Relation --Fiction

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