Dehati larke /
Bhartiya, Shashank,
Dehati larke / Shashank Bhartiya. - Noida : Hind Yugm, 2019. - 255 pages ; 21 cm.
Hindi novel.
देहाती लड़के गाँव से शहर आए एक युवा की शिक्षा, प्रेम, दोस्ती, संघर्ष और करियर की कहानी है। उपन्यास का मुख्य पात्र रजत ग्रामीण परिवेश से निकलकर उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ आता है। शहर और विश्वविद्यालय का आधुनिक वातावरण उसके लिए बिल्कुल नया है और उसे अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि तथा शहर की जीवन-शैली के बीच स्वयं को ढालना पड़ता है। कॉलेज में उसकी मुलाकात प्रेरणा और दो अलग-अलग स्वभाव वाले युवकों से होती है, जिनके साथ उसकी दोस्ती और भावनात्मक संबंध विकसित होते हैं। युवावस्था के प्रेम और मित्रता के साथ रजत के सामने करियर और भविष्य बनाने का दबाव भी लगातार बना रहता है। परिस्थितियों और गलतफहमियों के कारण उसके कुछ रिश्ते टूटते हैं और उसे यह समझ में आता है कि शहर में अपनी पहचान बनाने के लिए उसे स्वयं को साबित करना होगा। संघर्ष, असफलता और निराशा के बावजूद रजत अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटता और अंततः सरकारी सेवा में अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ता है। उपन्यास गाँव और शहर के बीच सांस्कृतिक अंतर, ग्रामीण युवाओं की आकांक्षाएँ, कॉलेज जीवन, प्रेम, मित्रता, प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्माण को सहज, रोचक और हास्यपूर्ण शैली में प्रस्तुत करता है।
9789387894907
Hindi fiction.
Hindi novels.
891.433 / BHA/D
Dehati larke / Shashank Bhartiya. - Noida : Hind Yugm, 2019. - 255 pages ; 21 cm.
Hindi novel.
देहाती लड़के गाँव से शहर आए एक युवा की शिक्षा, प्रेम, दोस्ती, संघर्ष और करियर की कहानी है। उपन्यास का मुख्य पात्र रजत ग्रामीण परिवेश से निकलकर उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ आता है। शहर और विश्वविद्यालय का आधुनिक वातावरण उसके लिए बिल्कुल नया है और उसे अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि तथा शहर की जीवन-शैली के बीच स्वयं को ढालना पड़ता है। कॉलेज में उसकी मुलाकात प्रेरणा और दो अलग-अलग स्वभाव वाले युवकों से होती है, जिनके साथ उसकी दोस्ती और भावनात्मक संबंध विकसित होते हैं। युवावस्था के प्रेम और मित्रता के साथ रजत के सामने करियर और भविष्य बनाने का दबाव भी लगातार बना रहता है। परिस्थितियों और गलतफहमियों के कारण उसके कुछ रिश्ते टूटते हैं और उसे यह समझ में आता है कि शहर में अपनी पहचान बनाने के लिए उसे स्वयं को साबित करना होगा। संघर्ष, असफलता और निराशा के बावजूद रजत अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटता और अंततः सरकारी सेवा में अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ता है। उपन्यास गाँव और शहर के बीच सांस्कृतिक अंतर, ग्रामीण युवाओं की आकांक्षाएँ, कॉलेज जीवन, प्रेम, मित्रता, प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्माण को सहज, रोचक और हास्यपूर्ण शैली में प्रस्तुत करता है।
9789387894907
Hindi fiction.
Hindi novels.
891.433 / BHA/D