Bholaram ka jiv /

Parsai, Harishankar,

Bholaram ka jiv / Harishankar Parsai. - New Delhi : Vani Prakashan, 2024. - 16 pages ; 23 cm.

'भोलाराम का जीव' हरिशंकर परसाई की प्रसिद्ध व्यंग्य रचना है, जिसमें एक साधारण सरकारी कर्मचारी भोलाराम की मृत्यु के बाद भी उसकी आत्मा के स्वर्ग न पहुँच पाने के प्रसंग के माध्यम से सरकारी कार्यालयों की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सिफारिश की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य किया गया है। धर्मराज और चित्रगुप्त जैसे पौराणिक पात्रों को सरकारी तंत्र की विसंगतियों से जोड़कर लेखक ने व्यवस्था की अमानवीयता और आम नागरिक की विवशता को हास्य तथा व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया है। रचना स्वतंत्रता के बाद के भारतीय नौकरशाही तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सामाजिक टिप्पणी प्रस्तुत करती है।

9788188473267 (paperback)


Hindi satire.
Satire, Hindi.
Bureaucracy --India--Fiction.

891.437 / PAR/B
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