Image from Google Jackets

Badi didi/ Sarat Chandra Chattopadhyay.

बड़ी दीदी / शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय. By: Language: Hindi Publication details: New Delhi : Vani Prakashan, 2026.Description: 73 pages ; 22 cmISBN:
  • 9789388434058 (paperback)
Subject(s): DDC classification:
  • 891.433 CHA/B
Summary: 'बड़ी दीदी' शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की प्रसिद्ध बंगाली कथा का हिंदी अनुवाद है। इसकी कथा पारिवारिक संबंधों, स्नेह, त्याग, सामाजिक प्रतिष्ठा और मानवीय भावनाओं के इर्द-गिर्द विकसित होती है। बड़ी दीदी का चरित्र परिवार के प्रति जिम्मेदारी, आत्मीयता और त्याग की भावना को सामने लाता है। लेखक सामाजिक मर्यादाओं, आर्थिक परिस्थितियों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच उत्पन्न तनावों को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करते हैं। यह कृति पारिवारिक जीवन और मानवीय संबंधों की जटिलताओं को सरल, भावपूर्ण कथन-शैली में अभिव्यक्त करती है। “बड़ी दीदी” शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रथम उपन्यास है और उनकी आरंभिक महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक माना जाता है। उपन्यास की कहानी माधवी (बड़ी दीदी) और सुरेंद्रनाथ के इर्द-गिर्द घूमती है। माधवी एक युवा विधवा है, जो परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाती है। वहीं सुरेंद्रनाथ एक संवेदनशील और कुछ हद तक अस्थिर स्वभाव का युवक है, जो माधवी के परिवार में उसकी छोटी बहन को पढ़ाने आता है। दोनों के बीच धीरे-धीरे एक गहरा और अव्यक्त भावनात्मक संबंध विकसित होता है। लेकिन उस समय के सामाजिक नियम, विशेषकर विधवा के पुनर्विवाह और स्त्री की स्वतंत्र भावनाओं पर लगाए गए बंधन, उनके संबंध के सामने बड़ी बाधा बन जाते हैं। शरतचंद्र ने इस उपन्यास के माध्यम से प्रेम, त्याग, सामाजिक रूढ़ियों, विधवा जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और मानवीय संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण किया है। सरल भाषा और भावनात्मक चरित्र-चित्रण इस रचना को पाठकों के लिए प्रभावशाली बनाते हैं। “बड़ी दीदी” उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो हिंदी में अनूदित क्लासिक साहित्य और सामाजिक-पारिवारिक उपन्यास पढ़ना पसंद करते हैं।
Tags from this library: No tags from this library for this title. Log in to add tags.
Star ratings
    Average rating: 0.0 (0 votes)
Holdings
Cover image Item type Current library Home library Collection Shelving location Call number Materials specified Vol info URL Copy number Status Notes Date due Barcode Item holds Item hold queue priority Course reserves
Rajbhasha Book (Hindi) Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section Central Library, IIT Bhubaneswar Rajbhasha Section RB 891.433 CHA/B (Browse shelf(Opens below)) Available RB1655
Total holds: 0

Hindi translation of the Bengali novella by Sarat Chandra Chattopadhyay.

'बड़ी दीदी' शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की प्रसिद्ध बंगाली कथा का हिंदी अनुवाद है। इसकी कथा पारिवारिक संबंधों, स्नेह, त्याग, सामाजिक प्रतिष्ठा और मानवीय भावनाओं के इर्द-गिर्द विकसित होती है। बड़ी दीदी का चरित्र परिवार के प्रति जिम्मेदारी, आत्मीयता और त्याग की भावना को सामने लाता है। लेखक सामाजिक मर्यादाओं, आर्थिक परिस्थितियों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच उत्पन्न तनावों को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करते हैं। यह कृति पारिवारिक जीवन और मानवीय संबंधों की जटिलताओं को सरल, भावपूर्ण कथन-शैली में अभिव्यक्त करती है। “बड़ी दीदी” शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रथम उपन्यास है और उनकी आरंभिक महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक माना जाता है। उपन्यास की कहानी माधवी (बड़ी दीदी) और सुरेंद्रनाथ के इर्द-गिर्द घूमती है। माधवी एक युवा विधवा है, जो परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाती है। वहीं सुरेंद्रनाथ एक संवेदनशील और कुछ हद तक अस्थिर स्वभाव का युवक है, जो माधवी के परिवार में उसकी छोटी बहन को पढ़ाने आता है।

दोनों के बीच धीरे-धीरे एक गहरा और अव्यक्त भावनात्मक संबंध विकसित होता है। लेकिन उस समय के सामाजिक नियम, विशेषकर विधवा के पुनर्विवाह और स्त्री की स्वतंत्र भावनाओं पर लगाए गए बंधन, उनके संबंध के सामने बड़ी बाधा बन जाते हैं। शरतचंद्र ने इस उपन्यास के माध्यम से प्रेम, त्याग, सामाजिक रूढ़ियों, विधवा जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और मानवीय संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण किया है। सरल भाषा और भावनात्मक चरित्र-चित्रण इस रचना को पाठकों के लिए प्रभावशाली बनाते हैं। “बड़ी दीदी” उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो हिंदी में अनूदित क्लासिक साहित्य और सामाजिक-पारिवारिक उपन्यास पढ़ना पसंद करते हैं।

There are no comments on this title.

to post a comment.
📊 Library Statistics
📚
0
Books
💻
0
E-Books
📰
0
E-Journals
🎓
0
Theses
📖
0
E-Theses & Dissertations
📰
0
E-Magazines & Newspapers
🗄️
0
E-Databases
👥
0
Users
📚
0
Publications