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Dr. ambedkar evam adhunik bharat / Harimohan Dhawan and Arun Kumar.

डॉ. अम्बेडकर एवं आधुनिक भारत / हरिमोहन धवन एवं अरुण कुमार. By: Contributor(s): Language: Hindi Publication details: New Delhi : Rawat Prakashan, 2025.Description: 304 pages ; 22 cmISBN:
  • 9788131614389 (paperback)
Subject(s): DDC classification:
  • 320.954092 DHA/D
Summary: यह पुस्तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों, सामाजिक योगदान तथा आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका पर केंद्रित है। इसमें सामाजिक न्याय, समानता, जाति-व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और वंचित वर्गों के अधिकारों से संबंधित उनके विचारों का विवेचन होने की संभावना है। डॉ. बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर सच्चे भारत भक्त थे। भारत का नवनिर्माण एवं सामाजिक उत्थान उनकी आत्मा थी। उन्होंने भारत की एकता, समरसता तथा सम्पन्नता की नींव को मजबूत करने के लिए जाति व्यवस्था पर चौतरफा प्रहार करते हुए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने भारतीय जाति व्यवस्था को भारतीय समाज का सबसे बड़ा कलंक बताया। जाति व्यवस्था में उनकी वैयक्तिक विषमताओं तथा सैद्धान्तिक रुचि ने उन्हें भारतीय सामाजिक संरचना में जाति व्यवस्था की भूमिका पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. अम्बेडकर का मत था कि आदर्श सामाजिक व्यवस्था न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुता पर आधारित होनी चाहिए। उनका यह विश्वास था कि यदि हम सामाजिक जीवन में लोकतंत्र की स्थापना नहीं कर पाते तो राजनीतिक जीवन में लोकतंत्र लंबे समय तक नहीं टिका रह सकता। सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र के अभाव में राजनीतिक लोकतंत्र छलावा है। व्यक्ति में समानता केवल राजनीतिक समानता से सार्थक नहीं बनाई जा सकती है। जब तक सामाजिक और आर्थिक समानता की स्थापना नहीं हो जाती तब तक समानता अधूरी ही रहेगी। इसके लिए उन्होंने समाज के कमजोर तबकों को ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो एवं संघर्ष करो’ के लिए प्रेरित किया। प्रस्तुत पुस्तक में भारत की वर्तमान दशा तथा डॉ. अम्बेडकर की जीवन गाथा तथा व्यक्तित्व के विविध आयामों का सूक्ष्म, विस्तृत तथा गहन विश्लेषण व मूल्यांकन किया गया है। आधुनिक भारतीय समाज में इनके विचारों की प्रासंगिकता की विशद विवेचना भी की गई है।
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यह पुस्तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों, सामाजिक योगदान तथा आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका पर केंद्रित है। इसमें सामाजिक न्याय, समानता, जाति-व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और वंचित वर्गों के अधिकारों से संबंधित उनके विचारों का विवेचन होने की संभावना है। डॉ. बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर सच्चे भारत भक्त थे। भारत का नवनिर्माण एवं सामाजिक उत्थान उनकी आत्मा थी। उन्होंने भारत की एकता, समरसता तथा सम्पन्नता की नींव को मजबूत करने के लिए जाति व्यवस्था पर चौतरफा प्रहार करते हुए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने भारतीय जाति व्यवस्था को भारतीय समाज का सबसे बड़ा कलंक बताया। जाति व्यवस्था में उनकी वैयक्तिक विषमताओं तथा सैद्धान्तिक रुचि ने उन्हें भारतीय सामाजिक संरचना में जाति व्यवस्था की भूमिका पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. अम्बेडकर का मत था कि आदर्श सामाजिक व्यवस्था न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुता पर आधारित होनी चाहिए। उनका यह विश्वास था कि यदि हम सामाजिक जीवन में लोकतंत्र की स्थापना नहीं कर पाते तो राजनीतिक जीवन में लोकतंत्र लंबे समय तक नहीं टिका रह सकता। सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र के अभाव में राजनीतिक लोकतंत्र छलावा है। व्यक्ति में समानता केवल राजनीतिक समानता से सार्थक नहीं बनाई जा सकती है। जब तक सामाजिक और आर्थिक समानता की स्थापना नहीं हो जाती तब तक समानता अधूरी ही रहेगी। इसके लिए उन्होंने समाज के कमजोर तबकों को ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो एवं संघर्ष करो’ के लिए प्रेरित किया। प्रस्तुत पुस्तक में भारत की वर्तमान दशा तथा डॉ. अम्बेडकर की जीवन गाथा तथा व्यक्तित्व के विविध आयामों का सूक्ष्म, विस्तृत तथा गहन विश्लेषण व मूल्यांकन किया गया है। आधुनिक भारतीय समाज में इनके विचारों की प्रासंगिकता की विशद विवेचना भी की गई है।

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