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020 _a9788170557760 (paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.4391
_bHAN/L
245 _6880-02
_aLokpriya shayar :
_bakbar Ilahabadi /
_cedited by Shamim Hanafi.
260 _aNew Delhi :
_bVani Prakashan,
_c2010.
300 _a148 pages ;
_c22 cm.
500 _a"अकबर' इलाहाबादी एक हास्य कवि के तौर पर जाने जाते हैं। मगर सच्ची बात यह है 'अकबर' की पूरी शायरी एक गहरा सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्य रखती है। अकबर ने हास्य और व्यंग्य को अपनी अभिव्यक्ति का केवल माध्यम बनाया था। अपनी कविता के ज़रिए वह एक मानसिक परिवर्तन लाना चाहते थे, एक नई चेतना जगाना चाहते थे, उपनिवेशवाद के खिलाफ एक संघर्ष जारी रखना चाहते थे। प्रोफ़ेसर रघुपति सहाय 'फ़िराक़' गोरखपुरी ने 'अकबर' की गणना केवल उर्दू या भारतवर्ष नहीं बल्कि एशिया के बड़े कवियों में की है। 'अकबर' की कविता से हमारा परिचय उस वातावरण में होता है जब हमारे सामूहिक जीवन में एक बहुत बड़ी उथल-पुथल और महान परिवर्तन का सिलसिला जारी था। अकबर ने सन् 1866 ई. के आसपास शायरी शुरू की थी। उन्होंने अपने ज़माने की समस्याओं को चेतना के स्तर पर समझने की कोशिश की थी। अँग्रेज़ी शासन के साथ विदेशी विचारधारा जिस तरह हमारे यहाँ अपने क़दम जमाती जा रही थी और उसके नतीजे में भारतीय समाज जिन नए प्रश्नों से दो-चार हो रहा था अकबर की शायरी में उन्हीं परिस्थितियों की गूंज सुनाई देती है। अकबर ने भारतीय समाज को एक नए यथार्थवाद का रास्ता दिखाया। यह बात 'अकबर' अच्छी तरह समझ चुके थे कि अँग्रेज़ी शासन, शिक्षा और सभ्यता के फैलते हुए प्रभाव के कारण भारतीय जीवन में जो तूफ़ान-सा आया हुआ है उसे आसानी से रोका नहीं जा सकता। भारतीय समाज की भलाई इसमें है कि आधुनिक युग से जुड़े हुए प्रश्नों को वह समझने और उनका ऐसा उत्तर ढूँढ़ने की कोशिश करे जिससे नए चैलेंजों से निपट भी लिया जाय और अपनी पहचान भी बनी रहे। इस आदर्श की पूर्ति के लिए 'अकबर' ने अपनी साहित्यिक साधना प्रारम्भ की। 'अकबर' का ख़याल था कि पश्चिमी सभ्यता का असर केवल यही नहीं कि हमारे देश के आर्थिक ढाँचे को तबाह कर देगा, उन्हें इस बात का डर भी था कि हमारे सामूहिक जीवन में अध्यात्मवाद और हमारे विश्वासों ने जो एक ख़ास रंग पैदा किया है और जिसके कारण हमारी एक अलग पहचान स्थापित हुई है उस पर भी पश्चिम की ओर से आक्रमण हो रहा है। 'अकबर' ने नए वैज्ञानिक आविष्कारों और पश्चिम की उन्नति के औद्योगिक आधारों पर गहरे शक की नज़र डाली। वह समझते थे कि मानव जीवन में जब नई वस्तुएँ प्रवेश करती हैं तो अन्दर-ही-अन्दर एक नया जाल-सा भी फैलाती जाती हैं। हमारी चेतना इस जाल में धीरे-धीरे फँसती जाती है और एक समय ऐसा भी आता है जब हम अपना पूरा अस्तित्व ही खो बैठते हैं। 'अकबर' स्वराज के हामी थे और उनका ख़याल था कि स्वराज की बुनियादें केवल भौतिक और राजनीतिक ही नहीं होतीं, हमारी भावनाएँ और हमारे मूल्य भी आज़ादी चाहते हैं। वस्तुएँ इन्सान की भावनाओं और मूल्यों से अलग होकर नहीं रह सकतीं। कवि का काम यही है कि वह आर्थिक सच्चाइयों या चीज़ों पर अपनी भावनाओं की मोहर लगा दे। औद्योगिक क्रान्ति के नतीजे में जिन नित नए जीवन साधनों और आविष्कारों से हमारा परिचय हुआ था उन सबने हमारी भावनाओं की सतह पर भी पंजे गाड़ दिए थे। अब हमारा जीवन ऊपर से भी बदल रहा था और अन्दर से भी बदल रहा था। 'अकबर' का ख़याल था कि इस परिस्थिति ने हमें धीरे-धीरे अन्दर और बाहर दोनों तरफ़ से बिगाड़ना और बर्बाद करना शुरू कर दिया था। अपनी कविता के ज़रिए 'अकबर' ने बर्बादी के इसी सिलसिले को रोकना चाहा । 'अकबर' की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि राजनीतिक और आर्थिक लूट-खसोट के पर्दे में उन्होंने अँग्रेज़ी शासन के पूरे षड्यन्त्र को समझ लिया था। उनका ख़याल था कि यह शासन एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है, जो सिर्फ बनावटी और नकली है। 'अकबर' को अच्छी तरह समझने के लिए भारतीय स्वभाव और सभ्यता के सन्दर्भ में उन्नीसवीं सदी की आखिरी दहाइयों और बीसवीं सदी की शुरू की दहाइयों से परिचित होना ज़रूरी है। ऐसी तमाम बातें जो 'अकबर' को दुखी करती हैं उनकी तरफ वह हँसी-हँसी में इशारा करते हैं। 'ग़ालिब' ने अपनी एक पंक्ति में जो बात कही थी कि 'दिल तो आँसुओं से भरा हुआ था मगर होंठों पर मुस्कुराहट फैली हुई थी, तो यही बात 'अकबर' पर भी पूरी उतरती है। वह अपनी पीड़ा को मुसकान में छुपाना जानते थे और इसके लिए अकबर ने एक नई काव्य भाषा का निर्माण किया था। उनकी भाषा में उर्दू के साथ-साथ अँग्रेज़ी, फ़ारसी, अरबी और हिन्दी के शब्द भी प्रयोग में आते थे ।"
520 _aयह पुस्तक उर्दू के प्रसिद्ध शायर अकबर इलाहाबादी के जीवन, काव्य-व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर केंद्रित है। इस लेख में अकबर इलाहाबादी की शायरी के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उद्देश्यों को स्पष्ट किया गया है। अकबर ने हास्य और व्यंग्य को केवल मनोरंजन का साधन न बनाकर अंग्रेज़ी शासन, उपनिवेशवाद तथा पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण के विरुद्ध जनचेतना जगाने का माध्यम बनाया। वे आधुनिक विज्ञान, औद्योगिक विकास और अंग्रेज़ी शिक्षा के बढ़ते प्रभाव से भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक मूल्यों और पारंपरिक जीवन-पद्धति पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति चिंतित थे। उनका मानना था कि स्वराज केवल राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भावनात्मक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी आवश्यक है। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से भारतीय समाज को आधुनिक चुनौतियों के प्रति जागरूक करते हुए अपनी पहचान और मूल्यों को बनाए रखने का संदेश दिया। उनकी शायरी की विशेषता यह थी कि वे गहरी सामाजिक पीड़ा और गंभीर विचारों को हास्य, व्यंग्य तथा सहज भाषा में प्रस्तुत करते थे। उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेज़ी, फ़ारसी और अरबी शब्दों का प्रयोग उनकी काव्यभाषा को विशिष्ट बनाता है।
650 _aUrdu poets
_vBiography.
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650 _aUrdu poetry
_xHistory and criticism.
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700 _aHanfi, Shamim
_eeditor
_928739
880 _6100-02
_aलोकप्रिय शायर :
_bअकबर इलाहाबादी /
_cशमीम हनफ़ी.
942 _cRB
999 _c15785
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