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020 _a9788119092345 ( Paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a910.4
_bSAN/G
100 _aSankrityayan, Rahul.
_eAuthor.
_97
245 _6880-02
_aGhumakkad Shastra /
_cRahul Sankrityayan.
250 _a3rd ed.
260 _aNew Delhi:
_bRadhakrishna Prakashan,
_c2026.
300 _a158 pages;
_c21 cm.
500 _aTravel accounts / travel description.
520 _aराहुल सांकृत्यायन की पुस्तक ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ में घुमक्कड़ी और यात्रा के महत्व को विस्तार से बताया गया है। लेखक के अनुसार यात्रा केवल मनोरंजन या एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, अनुभव और व्यक्तित्व-विकास का महत्वपूर्ण साधन है। घुमक्कड़ी से मनुष्य विभिन्न देशों, समाजों, संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकता है तथा उसकी सोच व्यापक और स्वतंत्र बनती है। सांकृत्यायन युवाओं को साहस, जिज्ञासा और आत्मनिर्भरता के साथ संसार को देखने और उससे सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके अनुसार सच्चा घुमक्कड़ जाति, धर्म, क्षेत्र और रूढ़ियों की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता को समझता है। इस प्रकार, घुमक्कड़ शास्त्र यात्रा को ज्ञान प्राप्ति, आत्म-विकास, स्वतंत्र चिंतन और व्यापक मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने का माध्यम मानने वाली एक प्रेरणादायक कृति है।
650 _aHindi travel literature.
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650 _aCultural awareness.
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_aघुमक्कड़ शास्त्र /
_cराहुल सांकृत्यायन
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