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020 _a9788183618236(Paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.433
_bVAL/G
100 _aValmiki, Omprakash.
_eAuthor
_928309
245 _6880-02
_aGuspaithiye /
_cOmprakash Valmiki.
250 _a4th ed.
260 _aNew Delhi:
_bRajkamal Prakashan,
_c2025.
300 _a118 pages;
_c21 cm.
500 _a Dalit Literature and its struggle.
520 _a“घुसपैठिये” ओमप्रकाश वाल्मीकि की एक महत्वपूर्ण हिंदी साहित्यिक कृति है। इस पुस्तक में लेखक ने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता, छुआछूत और वंचित वर्ग के संघर्षों को संवेदनशील एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। रचनाओं के माध्यम से दलित समाज के जीवन, उसके अनुभवों, पीड़ा, संघर्ष और सम्मान की आकांक्षा को अभिव्यक्ति मिलती है। लेखक ने सामाजिक व्यवस्था की विसंगतियों और भेदभावपूर्ण मानसिकता पर प्रश्न उठाते हुए समानता और मानवीय गरिमा की आवश्यकता को रेखांकित किया है। पुस्तक पाठकों को सामाजिक वास्तविकताओं को समझने और उन पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
650 _aHindi fiction.
_916150
650 _aDalit literature.
_928450
650 _aShort stories
_916896
880 _6100-02
_aघुसपैठिये /
_cओमप्रकाश वाल्मीकि
942 _cRB
999 _c15679
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