| 000 | 02988 a2200277 4500 | ||
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| 020 | _a9788183612531 (Paperback) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.433 _bYAD/S |
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| 100 |
_aYadav, Rajendra _eAuthor. _916447 |
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| 245 |
_6880-02 _aSara akash/ _cRajendra Yadav |
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| 250 | _a13th ed | ||
| 260 |
_aNew Delhi: _bRajkamal Prakashan, _c2025. |
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| 300 |
_a207 pages; _c21 cm. |
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| 500 | _aHindi novel. | ||
| 520 | _aराजेन्द्र यादव का उपन्यास सारा आकाश भारतीय मध्यवर्गीय परिवार और वैवाहिक जीवन की जटिलताओं को केंद्र में रखकर लिखा गया है। कहानी का मुख्य पात्र समर एक युवा है, जो अपने आदर्शों, सपनों और स्वतंत्र जीवन की आकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ना चाहता है। उसका विवाह प्रभा से होता है, लेकिन विवाह के बाद दोनों के बीच भावनात्मक दूरी, संकोच, अहं और पारिवारिक दबाव के कारण संबंधों में तनाव पैदा हो जाता है। संयुक्त परिवार का वातावरण, सामाजिक रूढ़ियाँ और आर्थिक सीमाएँ उनके वैवाहिक जीवन को और कठिन बना देती हैं। समर अपने व्यक्तिगत आदर्शों और वास्तविक जीवन की जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष करता है, जबकि प्रभा भी अपने अस्तित्व और भावनाओं के लिए संघर्ष करती है। उपन्यास के माध्यम से लेखक ने मध्यवर्गीय समाज, दांपत्य जीवन, पारिवारिक दबाव, स्त्री-पुरुष संबंध और युवा पीढ़ी के सपनों तथा यथार्थ के बीच के संघर्ष को संवेदनशील एवं यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया है। | ||
| 650 |
_aHindi fiction _916150 |
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| 650 |
_aMiddle class life _vfiction _928441 |
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| 650 |
_aHuman Relation _vFiction _928442 |
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| 880 |
_6100-02 _aसारा आकाश/ _c राजेन्द्र यादव |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
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