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020 _a9789390971831 (paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.434
_bJOS/N
100 _aJoshi, Sharad,
_eauthor.
_916166
245 _6880-02
_aNadi me khada kavi /
_cSharad Joshi.
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2021.
300 _a215 pages ;
_c21 cm.
500 _aCollection of Hindi satirical essays.
520 _aनदी में खड़ा कवि शरद जोशी के चर्चित व्यंग्य-लेखों का संग्रह है। इसमें लेखक ने सामाजिक जीवन, राजनीति, प्रशासन, पाखंड, भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और मानवीय व्यवहार की विसंगतियों को हास्य और तीखी आलोचनात्मक दृष्टि के साथ प्रस्तुत किया है। सामान्य जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं और परिस्थितियों को आधार बनाकर शरद जोशी उनके भीतर छिपी विडंबनाओं को उजागर करते हैं। उनकी भाषा सहज, चुटीली और प्रभावशाली है, जिसमें मनोरंजन के साथ गंभीर सामाजिक सरोकार भी जुड़े हुए हैं। संग्रह के व्यंग्य पाठक को केवल हँसाते नहीं, बल्कि अपने आसपास की व्यवस्था, सामाजिक व्यवहार और सार्वजनिक जीवन पर सोचने के लिए भी प्रेरित करते हैं। पाखंड, दिखावा, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता और प्रशासनिक विसंगतियों पर लेखक का व्यंग्य विशेष रूप से प्रभावशाली है। हास्य और सामाजिक आलोचना का संतुलन इस संग्रह की प्रमुख विशेषता है। यह कृति शरद जोशी की विशिष्ट व्यंग्य-दृष्टि, भाषा-शिल्प और सामाजिक चेतना का प्रतिनिधित्व करती है।
650 _aHindi essays.
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650 _aHindi satire.
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650 _aSatire, Hindi.
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650 _aSocial conditions
_zIndia
_vSatire.
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880 _6100-02
_aनदी में खड़ा कवि /
_cशरद जोशी.
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