| 000 | 03538 a2200289 4500 | ||
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| 003 | IN-BhIIT | ||
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| 020 | _a9789392757327 (paperback) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.43092 _bBEN/L |
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| 100 |
_aBeniwal, Anuradha, _eauthor. _928412 |
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| 245 |
_6880-02 _aLog jo mujhmein reh gaye / _cAnuradha Beniwal. |
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| 250 | _a3rd edition. | ||
| 260 |
_aNew Delhi : _bRajkamal Prakashan, _c2025. |
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| 300 | _c21 cm. | ||
| 500 | _aMemoir based on the author's encounters and relationships with people during her travels and life experiences. | ||
| 520 | _a'लोग जो मुझमें रह गए' अनुराधा बेनीवाल की संस्मरणात्मक कृति है, जिसमें लेखिका ने अपने जीवन और यात्राओं के दौरान मिले उन लोगों को याद किया है जिन्होंने उनके व्यक्तित्व, सोच और भावनात्मक संसार पर गहरा प्रभाव छोड़ा। पुस्तक में अलग-अलग देशों और परिस्थितियों में हुई मुलाकातों के माध्यम से मानवीय संबंधों, आत्मीयता, दोस्ती, प्रेम, बिछड़ने और स्मृति के अनुभवों को प्रस्तुत किया गया है। लेखिका के लिए यात्रा केवल स्थानों की खोज नहीं, बल्कि मनुष्यों को समझने और उनके जीवन से सीखने की प्रक्रिया भी है। प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ कोई अनुभव, विचार, भावना या स्मृति छोड़ जाता है और इस प्रकार वे लोग भौतिक रूप से दूर होने के बाद भी लेखिका के भीतर जीवित रहते हैं। कृति में विविध संस्कृतियों और जीवन-शैलियों के बीच मानवीय समानताओं को रेखांकित किया गया है तथा यह बताया गया है कि जीवन में मिलने वाले लोग हमारी दृष्टि और व्यक्तित्व को किस प्रकार बदल सकते हैं। आत्मीय भाषा और व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से यह पुस्तक स्मृति, संबंध, यात्रा और मानवीय संवेदना का मार्मिक दस्तावेज प्रस्तुत करती है। | ||
| 650 |
_aHindi prose literature. _928417 |
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| 650 |
_aMemoirs, Hindi. _928418 |
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| 650 |
_aTravel writing, Hindi. _928399 |
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| 650 |
_aTravelers _zIndia _vBiography. _928400 |
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| 880 |
_6100-02 _aलोग जो मुझमें रह गए / _cअनुराधा बेनीवाल. |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
_c15651 _d15651 |
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