| 000 | 02284 a2200253 4500 | ||
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| 001 | RB1593 | ||
| 003 | IN-BhIIT | ||
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| 020 | _a9789394871922 (paperback) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.431 _bVAN/E |
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| 100 |
_aVani, Shailesh, _eauthor. _928402 |
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| 245 |
_6880-02 _aEk ghar chand par / _cShailesh Vani. |
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| 260 |
_aNew Delhi : _bPrabhat Prakashan, _c2024. |
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| 300 |
_a118 pages ; _c21 cm. |
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| 520 | _a'एक घर चाँद पर' शैलेष वाणी की हिन्दी साहित्यिक कृति है, जिसमें चाँद पर घर बनाने की कल्पना के माध्यम से मानवीय सपनों, आकांक्षाओं, प्रेम, आशा और बेहतर जीवन की खोज को अभिव्यक्त किया गया है। रचना में कल्पना और यथार्थ के बीच का संबंध तथा मनुष्य की उन इच्छाओं को रेखांकित किया गया है जो उसे अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर नए संसार की कल्पना करने के लिए प्रेरित करती हैं। चाँद पर घर का रूपक व्यक्ति के भीतर बसे सुरक्षित, सुंदर और आत्मीय संसार की आकांक्षा का प्रतीक बनकर उभरता है। कृति में मानवीय संवेदनाओं, संबंधों और भविष्य के प्रति आशावादी दृष्टिकोण को सरल एवं प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया गया है। | ||
| 650 | _aHindi literature. | ||
| 650 |
_aHindi poetry. _917359 |
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| 650 |
_aHuman relationships _vLiterature. _928403 |
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| 880 |
_6100-02 _aएक घर चाँद पर / _cशैलेष वाणी. |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
_c15642 _d15642 |
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