| 000 | 03467 a2200265 4500 | ||
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| 020 | _a9789390900657 (Paperback) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.433 _bCHA/S |
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| 100 |
_aAcharya Chatursen _eAuthor. _928362 |
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| 245 |
_6880-02 _aSomnath / _cAcharya Chatursen |
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| 260 |
_aNew Delhi : _bPrabhat Prakashan , _c2026. |
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| 300 |
_a413 pages ; _c21 cm. |
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| 500 | _aHistorical Fiction | ||
| 520 | _aआचार्य चतुरसेन का ‘सोमनाथ’ एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसकी कथा सोमनाथ मंदिर और महमूद गजनवी के आक्रमण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। उपन्यास में उस समय के भारत की राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। सोमनाथ मंदिर को समृद्धि, आस्था और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जहाँ दूर-दूर से लोग श्रद्धा के लिए आते हैं। इसी बीच महमूद गजनवी के आक्रमण का संकट उत्पन्न होता है और मंदिर तथा उसके आसपास के लोगों के सामने कठिन परिस्थितियाँ आ जाती हैं। कथा में राजा भीमदेव, गंग सर्वज्ञ और चौला जैसे पात्रों के माध्यम से वीरता, प्रेम, त्याग, आस्था और मानवीय भावनाओं को उभारा गया है। लेखक ने युद्ध और राजनीतिक संघर्ष के साथ-साथ राजाओं के आपसी मतभेद, स्वार्थ और सामाजिक कमजोरियों को भी चित्रित किया है। सोमनाथ का विनाश केवल एक मंदिर के विध्वंस के रूप में नहीं, बल्कि उस समय के समाज और राजनीतिक परिस्थितियों के गहरे संकट के रूप में सामने आता है। इस प्रकार ‘सोमनाथ’ इतिहास, प्रेम, वीरता, संघर्ष, त्याग और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ प्रस्तुत करने वाला प्रभावशाली ऐतिहासिक उपन्यास है। | ||
| 650 |
_aHindi Fiction _916150 |
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| 650 | _aHistorical Fiction | ||
| 650 |
_aIndian History _93046 |
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| 880 |
_6100-02 _aसोमनाथ / _cआचार्य चतुरसेन |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
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