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020 _a9789392820793 (Paperback)
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041 _ahin
082 _a891.433
_bKAU/T
100 _akaul, Manav.
_eAuthor
_924306
245 _6880-023
_aTooti hui bikhari hui /
_cManav Kaul.
250 _a3rd ed.
260 _aNoida :
_bHind Yugm,
_c2025 .
300 _a252 pages ;
_c21 cm .
500 _a fiction book
520 _aमानव कौल की ‘टूटी हुई बिखरी हुई’ एक संवेदनशील और भावप्रधान हिंदी कृति है, जिसमें मनुष्य के भीतर चलने वाले अकेलेपन, प्रेम, रिश्तों, स्मृतियों और भावनात्मक संघर्षों को प्रस्तुत किया गया है। रचना में पात्र अपने अतीत, संबंधों और जीवन के अनुभवों से जूझते हुए दिखाई देते हैं। बीती हुई घटनाएँ और रिश्ते उनके वर्तमान जीवन को प्रभावित करते हैं और उन्हें अपने अस्तित्व तथा भावनाओं को समझने के लिए प्रेरित करते हैं। लेखक ने बाहरी घटनाओं की अपेक्षा पात्रों के मन और उनकी आंतरिक स्थितियों को अधिक महत्व दिया है। सरल, आत्मीय और संवेदनशील भाषा के माध्यम से रचना में टूटन, बिखराव, प्रेम, बिछड़ने की पीड़ा और स्वयं को खोजने की प्रक्रिया को उभारा गया है। यह कृति पाठक को मानवीय संबंधों और जीवन की जटिल भावनाओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
650 _aHindi fiction
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650 _aHindi literature
880 _6100-02
_aटूटी हुई बिखरी हुई /
_cमानव कौल
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