| 000 | 02682 a2200265 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 001 | RB1577 | ||
| 003 | IN-BhIIT | ||
| 005 | 20260811152240.0 | ||
| 008 | 260811b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789352662678 (paperback) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.443 _bCHA/G |
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| 100 |
_aChattopadhyay, Sarat Chandra, _eauthor. _926236 |
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| 245 |
_6880-02 _aGr̥hadāha / _cSarat Chandra Chattopadhyay. |
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| 260 |
_aNew Delhi : _bPrabhat Prakashan, _c2024. |
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| 300 |
_a192 pages ; _c22 cm. |
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| 500 | _aHindi translation of the Bengali novel Griha Daha. | ||
| 520 | _aगृहदाह शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है। उपन्यास में महिम, सुरेश और अचला के बीच संबंधों के माध्यम से प्रेम, विवाह, मित्रता, सामाजिक रूढ़ियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है। अचला का जीवन प्रेम और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच फँस जाता है, जबकि महिम और सुरेश के व्यक्तित्व एवं विचारधाराएँ कथा को गहरे भावनात्मक द्वंद्व की ओर ले जाती हैं। रचना में ब्रह्म समाज और रूढ़िवादी सामाजिक व्यवस्था के बीच वैचारिक अंतर, स्त्री की स्थिति तथा विवाह संस्था की जटिलताओं को भी प्रमुखता दी गई है। मानवीय संवेदनाओं, त्याग, ईर्ष्या, अहंकार और सामाजिक बंधनों का सूक्ष्म चित्रण इस उपन्यास को एक महत्वपूर्ण सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक कृति बनाता है। | ||
| 650 |
_aBengali fiction _vTranslations into Hindi. _928276 |
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| 650 |
_aLove stories, Bengali _vTranslations into Hindi. _928351 |
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| 650 |
_aMarriage _zIndia _vFiction. _928317 |
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| 880 |
_6100-02 _aगृहदाह / _cशरतचंद्र चट्टोपाध्याय. |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
_c15626 _d15626 |
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