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040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.433
_bSIN/R
100 _aकाशीनाथ सिंह
_eAuthor
_928116
245 _6880-02
_aRehan par ragghu /
_cKashinath Singh.
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2025
300 _a164 pages ;
_c21 cm.
520 _a‘रेहन पर रग्घू’ काशीनाथ सिंह का प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसमें बदलते सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के बीच एक सामान्य व्यक्ति के संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है। उपन्यास का मुख्य पात्र रग्घू है, जो अपने परिवार की जिम्मेदारियों, आर्थिक परेशानियों और बदलते समय के दबावों से जूझता रहता है। वह अपने परिवार को एकजुट रखने और बच्चों का भविष्य सँवारने का प्रयास करता है, लेकिन समय के साथ परिवार के सदस्यों की सोच और प्राथमिकताएँ बदलने लगती हैं। नई पीढ़ी आधुनिक जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपने सपनों को अधिक महत्व देती है, जबकि रग्घू परंपरागत पारिवारिक मूल्यों और जिम्मेदारियों से बँधा रहता है। इसी कारण उसके जीवन में तनाव, अकेलापन और असुरक्षा बढ़ती जाती है। ‘रेहन पर’ शब्द रग्घू की उस स्थिति का प्रतीक है, जिसमें वह अपने जीवन, इच्छाओं और आत्मसम्मान तक को परिवार और परिस्थितियों के लिए दाँव पर लगा देता है। उपन्यास के माध्यम से लेखक ने परिवार के विघटन, पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी, आर्थिक संघर्ष, बदलती सामाजिक व्यवस्था और मनुष्य के अकेलेपन को संवेदनशील ढंग से चित्रित किया है। कुल मिलाकर, ‘रेहन पर रग्घू’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपने परिवार के लिए लगातार त्याग करता है, लेकिन बदलते समय में वही परिवार और सामाजिक परिस्थितियाँ उसे भीतर से अकेला कर देती हैं।
650 _aउपन्यास
_928335
650 _aसामाजिक उपन्यास
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650 _aभूमंडलीकरण
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650 _aपारिवारिक संबंध
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880 _6100-02
_aरेहन पर रग्घू
_cकाशीनाथ सिंह
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