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020 _a9788171786657 (paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.433
_bSHU/A
100 _aShukla, Shrilal,
_eauthor.
_96336
245 _6880-02
_aAdmi ka zahar /
_cShrilal Shukla.
250 _a10th edition.
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2023.
300 _a144 pages ;
_c21 cm.
500 _aHindi crime and mystery novel.
520 _a'आदमी का ज़हर' श्रीलाल शुक्ल का एक रहस्यपूर्ण अपराध-कथा आधारित हिन्दी उपन्यास है। कथा की शुरुआत हरिश्चन्द्र नामक एक ईर्ष्यालु पति से होती है, जो अपनी पत्नी रूबी पर संदेह करता है और उसके एक परिचित की हत्या कर देता है। प्रारंभ में यह घटना एक सामान्य हत्या जैसी प्रतीत होती है, लेकिन शीघ्र ही इसके पीछे छिपे रहस्यों, अपराधों और षड्यंत्रों की परतें खुलने लगती हैं। पत्रकार उमाकान्त घटनाओं की तह तक पहुँचने का प्रयास करता है और उसके माध्यम से पाठक हत्या, संदेह, अपराध तथा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों की जटिल दुनिया से परिचित होता है। उपन्यास में पारंपरिक जासूसी कथा के रोमांच के साथ समकालीन समाज, मानवीय संदेह, अपराधबोध और नैतिक पतन का चित्रण किया गया है। यह रचना मनोरंजन के साथ-साथ पाठक को सामाजिक और मानवीय प्रश्नों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती है।
650 _aHindi fiction.
_916150
650 _aMystery fiction, Hindi.
_928330
650 _aCrime fiction, Hindi.
_928331
880 _6100-02
_aआदमी का ज़हर /
_cश्रीलाल शुक्ल.
942 _cRB
999 _c15621
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