| 000 | 02304 a2200253 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 001 | RB1566 | ||
| 003 | IN-BhIIT | ||
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| 008 | 260810b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9788188473267 (paperback) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.437 _bPAR/B |
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| 100 |
_aParsai, Harishankar, _eauthor. _924233 |
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| 245 |
_6880-02 _aBholaram ka jiv / _cHarishankar Parsai. |
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| 260 |
_aNew Delhi : _bVani Prakashan, _c2024. |
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| 300 |
_a16 pages ; _c23 cm. |
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| 520 | _a'भोलाराम का जीव' हरिशंकर परसाई की प्रसिद्ध व्यंग्य रचना है, जिसमें एक साधारण सरकारी कर्मचारी भोलाराम की मृत्यु के बाद भी उसकी आत्मा के स्वर्ग न पहुँच पाने के प्रसंग के माध्यम से सरकारी कार्यालयों की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सिफारिश की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य किया गया है। धर्मराज और चित्रगुप्त जैसे पौराणिक पात्रों को सरकारी तंत्र की विसंगतियों से जोड़कर लेखक ने व्यवस्था की अमानवीयता और आम नागरिक की विवशता को हास्य तथा व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया है। रचना स्वतंत्रता के बाद के भारतीय नौकरशाही तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सामाजिक टिप्पणी प्रस्तुत करती है। | ||
| 650 |
_aHindi satire. _917856 |
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| 650 |
_aSatire, Hindi. _928315 |
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| 650 |
_aBureaucracy _zIndia _vFiction. _928316 |
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| 880 |
_6100-02 _aभोलाराम का जीव / _ccहरिशंकर परसाई. |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
_c15615 _d15615 |
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