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020 _a9788188473267 (paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.437
_bPAR/B
100 _aParsai, Harishankar,
_eauthor.
_924233
245 _6880-02
_aBholaram ka jiv /
_cHarishankar Parsai.
260 _aNew Delhi :
_bVani Prakashan,
_c2024.
300 _a16 pages ;
_c23 cm.
520 _a'भोलाराम का जीव' हरिशंकर परसाई की प्रसिद्ध व्यंग्य रचना है, जिसमें एक साधारण सरकारी कर्मचारी भोलाराम की मृत्यु के बाद भी उसकी आत्मा के स्वर्ग न पहुँच पाने के प्रसंग के माध्यम से सरकारी कार्यालयों की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सिफारिश की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य किया गया है। धर्मराज और चित्रगुप्त जैसे पौराणिक पात्रों को सरकारी तंत्र की विसंगतियों से जोड़कर लेखक ने व्यवस्था की अमानवीयता और आम नागरिक की विवशता को हास्य तथा व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया है। रचना स्वतंत्रता के बाद के भारतीय नौकरशाही तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सामाजिक टिप्पणी प्रस्तुत करती है।
650 _aHindi satire.
_917856
650 _aSatire, Hindi.
_928315
650 _aBureaucracy
_zIndia
_vFiction.
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880 _6100-02
_aभोलाराम का जीव /
_ccहरिशंकर परसाई.
942 _cRB
999 _c15615
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