000 02591 a2200289 4500
001 RB1565
003 IN-BhIIT
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020 _a9788183616935
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a928.9143
_bVAL/J
100 _aBalmiki, Omprakash
_eAuthor
_928310
245 _6800-02
_aJoothan Bhag-2
_cOmprakash Balmiki.
250 _a13th Ed.
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2026.
300 _a152 pages.
_c21 cm.
500 _aAutobiographical account of the life of Omprakash Valmiki, depicting the social discrimination, untouchability, poverty, and struggles experienced by Dalits in India. The work is regarded as a landmark in Hindi Dalit literature.
520 _aजूठन' (भाग–2) ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा का दूसरा भाग है, जिसमें उनके जीवन के आगे के संघर्षों, उच्च शिक्षा, नौकरी, साहित्यिक यात्रा तथा सामाजिक सक्रियता का विस्तृत वर्णन किया गया है। लेखक ने यह दर्शाया है कि व्यक्तिगत उपलब्धियों के बावजूद जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता विभिन्न संस्थानों और कार्यस्थलों पर किस प्रकार बनी रहती है। यह पुस्तक दलित समाज के अधिकारों, सम्मान, समानता और सामाजिक न्याय के लिए लेखक के निरंतर संघर्ष तथा हिंदी दलित साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान को प्रस्तुत करती है। यह समकालीन भारतीय समाज में जाति व्यवस्था की वास्तविकताओं का सशक्त दस्तावेज है।
650 _aDalits
_xBiography
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650 _aUntouchability
_xIndia
_928308
650 _aHindi autobiography
_917443
700 _aVālmīki, Omprakash
_eAuthor
_928309
880 _6100-02
_aजूठन भाग-2/
_bओमप्रकाश वाल्मीकि.
942 _cRB
999 _c15614
_d15614