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020 _a9788171198542 (paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a928.9143
_bVAL/J
100 _a Balmiki, Omprakash
_eAuthor
_928310
245 _6800-02
_aJoothan Bhag-1/
_cOmprakash Balmiki.
250 _a22nd ed
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2026.
300 _a164 pages;
_c21 cm.
500 _aAutobiographical account of the author's childhood and life experiences as a Dalit in India.
520 _a'जूठन भाग-1' ओमप्रकाश वाल्मीकि की प्रसिद्ध आत्मकथात्मक कृति है, जिसमें लेखक ने अपने बचपन, परिवार, शिक्षा और सामाजिक जीवन के अनुभवों के माध्यम से जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता, सामाजिक अपमान और आर्थिक विषमता की पीड़ादायक वास्तविकताओं को अभिव्यक्त किया है। पुस्तक में दलित जीवन के संघर्ष, सम्मान और पहचान की तलाश तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बंधनों को चुनौती देने की प्रक्रिया का मार्मिक चित्रण मिलता है। लेखक अपने व्यक्तिगत अनुभवों को व्यापक दलित समाज की सामाजिक स्थिति और संघर्ष से जोड़ते हुए जाति-व्यवस्था की अमानवीयता पर प्रश्न उठाते हैं। यह कृति दलित चेतना, सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और प्रतिरोध की सशक्त अभिव्यक्ति है।
650 _aDalits
_zIndia
_vBiography
_928313
650 _aCaste discrimination
_xIndia
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700 _aVālmīki, Omprakash
_eAuthor
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880 _6100-02
_aजूठन भाग-1/
_cओमप्रकाश वाल्मीकि.
942 _cRB
999 _c15613
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