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020 _a9788180315183 (paperback)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.433
_bYAS/J
100 _aYashpal,
_eauthor.
_916603
245 _6880-02
_aJhūṭhā sach /
_cYashpal.
260 _aPrayagraj :
_bLokbharti Prakashan,
_c2020.
300 _a415 pages ;
_c22 cm.
500 _aA classic Hindi novel depicting the social, political, and human consequences of the Partition of India. Originally published in two parts: Vatan aur Desh and Desh ka Bhavishya.
520 _a'झूठा सच' यशपाल का हिन्दी साहित्य का एक कालजयी उपन्यास है, जो भारत के विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी और उसके सामाजिक, राजनीतिक तथा मानवीय प्रभावों का अत्यंत यथार्थ एवं संवेदनशील चित्रण प्रस्तुत करता है। उपन्यास में विभाजन से पूर्व और उसके बाद के परिवर्तित सामाजिक परिवेश, सांप्रदायिक तनाव, विस्थापन, शरणार्थियों के संघर्ष, बदलते राजनीतिक परिदृश्य तथा सामान्य जनजीवन की पीड़ा का विस्तृत वर्णन किया गया है। लेखक ने तारा, जयदेव, कनक और अन्य पात्रों के माध्यम से स्वतंत्रता, राष्ट्रनिर्माण, मानवीय संबंधों, आदर्शों तथा यथार्थ के बीच उत्पन्न संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। यह कृति भारतीय इतिहास, विभाजन साहित्य और आधुनिक हिन्दी उपन्यास की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में गिनी जाती है।
650 _aHindi fiction.
_916150
650 _aHistorical fiction, Hindi.
_928267
650 _aPartition of India, 1947
_vFiction.
_928272
650 _aRefugees
_zIndia
_vFiction.
_928273
880 _6100-02
_aझूठा सच /
_cयशपाल.
942 _cRB
999 _c15606
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