| 000 | 02525 a2200289 4500 | ||
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| 001 | RB1556 | ||
| 003 | IN-BhIIT | ||
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| 020 | _a9789390625437 (paperback) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.433 _bYAS/D |
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| 100 |
_aYashpal, _eauthor. _916603 |
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| 245 |
_6880-02 _aDivya / _cYashpal. |
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| 260 |
_aPrayagraj : _bLokbharti Prakashan, _c2018. |
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| 300 |
_a160 pages ; _c22 cm. |
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| 500 | _aHistorical novel originally published in 1945 and based on the socio-cultural milieu of ancient India. | ||
| 520 | _a'दिव्या' यशपाल का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सामाजिक उपन्यास है, जिसकी पृष्ठभूमि प्राचीन भारतीय समाज, विशेषतः बौद्धकालीन परिवेश पर आधारित है। उपन्यास की नायिका 'दिव्या' के जीवन-संघर्ष के माध्यम से तत्कालीन समाज में स्त्री की स्थिति, वर्णव्यवस्था, दासप्रथा, सामाजिक विषमता तथा धार्मिक एवं राजनीतिक संरचनाओं का यथार्थ चित्रण किया गया है। लेखक ने इतिहास को विश्लेषणात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करते हुए स्वतंत्रता, समानता, नारी-अस्मिता और मानवीय गरिमा के प्रश्नों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। यह कृति इतिहास, समाज और मानवीय मूल्यों का गहन अध्ययन प्रस्तुत करने वाला हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण उपन्यास है। | ||
| 650 |
_aHindi fiction. _916150 |
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| 650 |
_aHistorical fiction, Hindi. _928267 |
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| 650 |
_aWomen _vFiction. _928268 |
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| 650 |
_aWomen's rights _vFiction. _928269 |
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| 650 |
_aHistorical novels. _928270 |
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| 880 |
_6100-02 _aदिव्या / _cयशपाल. |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
_c15605 _d15605 |
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