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040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.433
_bBHA/A
100 _aBhandari, Mannu,
_eauthor.
_924305
245 _6880-02
_aApaka banti /
_cMannu Bhandari.
250 _a4th edition.
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2025.
300 _a128 pages ;
_c22 cm.
500 _aOriginally published in 1971.
520 _a'आपका बंटी' मन्नू भंडारी का हिन्दी साहित्य का एक कालजयी मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक उपन्यास है। यह उपन्यास बंटी नामक एक बालक की संवेदनशील दृष्टि से टूटते हुए वैवाहिक संबंधों, तलाक, पुनर्विवाह और उनके कारण उत्पन्न पारिवारिक विघटन का मार्मिक चित्रण करता है। माता-पिता के अलगाव के बीच बंटी के मन में उत्पन्न अकेलापन, असुरक्षा, भावनात्मक संघर्ष तथा पहचान के संकट को लेखिका ने अत्यंत यथार्थ एवं संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कृति बाल मनोविज्ञान, पारिवारिक संबंधों, बदलते सामाजिक मूल्यों तथा आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर गहन प्रकाश डालती है और पाठकों को मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक उत्तरदायित्व तथा सामाजिक परिवर्तन पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
650 _aHindi fiction.
_916150
650 _aDomestic fiction.
_928264
650 _aChildren of divorced parents
_vFiction.
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880 _6100-02
_aआपका बंटी /
_cमन्नू भंडारी.
942 _cRB
999 _c15603
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