| 000 | 02972 a2200241 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 001 | RB1536 | ||
| 003 | IN-BhIIT | ||
| 005 | 20260527185011.0 | ||
| 008 | 260527b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789350482612 (pbk.) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a925 _bSRI/I |
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| 100 |
_aSrivastava, Preeti _eAuthor _927839 |
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| 245 |
_6100-02 _aIssac newton : _bpratyak kriya k warabar wa wiprit kriya / _cPreeti Srivastava |
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| 260 |
_aDelhi : _bPrabhat Prakashan, _c2018. |
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| 300 |
_a114 p. : _bill. ; _c20 cm. |
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| 504 | _aIncludes bibliographical references and index. | ||
| 520 | _aसर आइजक न्यूटन अपने समय के बड़े एवं प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में थे। उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके बारे में कहा जाता था— प्रकृति अँधेरे में थी, प्रकृति के नियम अँधेरे में थे, तब न्यूटन पैदा हुए और चारों ओर उजाला हो गया। गुरुत्वाकर्षण का प्रसिद्ध सिद्धांत, जिसके अनुसार पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है, न्यूटन ने स्थापित किया था। न्यूटन का महान् ग्रंथ ‘प्रिंसिपिया’ विश्वप्रसिद्ध है, जिसमें उनके गति-नियमों (Laws of Motion) की व्याख्या है। इसके अतिरिक्त उन्होंने और भी अनेक खोजें की थीं। प्रस्तुत पुस्तक में न्यूटन के जीवन से संबंधित अनेक महत्त्वपूर्ण संदर्भों एवं घटनाओं तथा उनके स्वभाव, व्यवहार व प्रवृत्तियों का ब्योरेवार वर्णन है। विश्वास है, इसे पढ़कर पाठकगण सर आइजक न्यूटन के जीवन से संबंधित अनेक तथ्यों एवं संदर्भों को जान सकेंगे।. | ||
| 650 |
_aPhysicists _xBiography _927856 |
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| 880 |
_6100-02 _aआइज़क न्यूटन : _bप्रत्यक क्रिया के बाराबर वा विपरीत प्रतिक्रिया / _cप्रीति श्रीवास्तव |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
_c15404 _d15404 |
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