000 01709 a2200241 4500
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040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.431
_bVER/Y
100 _aVerma, Mahadevi
_eAuthor
_916130
245 _6880-02
_aYama /
_cMahadevi Verma
250 _a2nd ed.
260 _aPrayagraj :
_bLokbharti Prakashan,
_c2024.
300 _axi, 104 p. :
_bill. ;
_c19 cm.
504 _aIncludes bibliographical references and index.
520 _aप्रस्तुत पुस्तक यामा में महादेवी की काव्य यात्रा के चार आयाम संगृहीत हैं, नीहार, रशिम, नीरजा तथा सांध्यगीत जो भाव और चिंतन जगत की क्रमबद्धता के कारण महत्त्पूर्ण हैं! प्रत्येक आयाम में नवीनता तथा विशिष्टता का परिचय दिया गया है फिर भी अपेक्षाकृत मानवीकरण एवं प्रतेकत्मकता पर बल दिया गया है! प्रकृति के स्थूल सौंदर्य में भी प्रायः महादेवी ने मानवीय भावनाओं व् क्रिया-कलापों का साक्षात्कार किया!
880 _6100-02
_aयामा /
_cमहादेवी वर्मा
942 _cRB
999 _c15375
_d15375