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040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
100 _aPant, Sumitranandan
_eAuthor
_927792
245 _6880-02
_aChidambara /
_c Sumitranandan Pant
250 _a16th ed.
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2024.
300 _a351 p. :
_bill. ;
_c20 cm.
504 _aIncludes bibliographical references and index.
520 _aछायावाद के प्रमुख स्तम्भ सुमित्रानंदन पंत की काव्यचेतना का प्रतिबिम्बन है ‘चिदंबरा’। इसमें कवि के 1937 से 1957 तक की बीस वर्षों की विकास-यात्रा की झलक मिलती है। स्वयं पंत ने स्वीकार किया है कि ‘चिदंबरा’ में उनकी भौतिक, मानसिक, आध्यात्मिक संचरणों से प्रेरित आन्तरिक लयबद्धता व्याप्त है। ‘युगवाणी’ से लेकर ‘अतिमा’ तक की रचनाओं के इस संचयन में पंत की काव्य-चेतना का संचरण ‘चिंदबरा’ में परिलक्षित होता है। पंत ने भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दर्शनों से जीवनोपयोगी तत्त्वों को लेकर अपनी रचनाओं में भरे-पूरे मनुष्यत्व का निर्माण करने का प्रयास किया है जिसकी आवश्यकता आज भी बनी हुई है।
880 _6100-02
_aचिदंबरा /
_cसुमित्रानंदन पंत
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