| 000 | 02239 a2200253 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 001 | RB1520 | ||
| 003 | IN-BhIIT | ||
| 005 | 20260527184650.0 | ||
| 008 | 260527b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789348157652 (pbk.) | ||
| 040 | _aIN-BhIIT | ||
| 041 | _ahin | ||
| 082 |
_a891.433 _bCHO/C |
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| 100 |
_aChoubey, Gautam _eAuthor _927837 |
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| 245 |
_6880-02 _aChakka jaam / _c Gautam Choubey |
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| 260 |
_aDelhi : _bRadhakrishna Prakashan, _c2024. |
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| 300 |
_a221 p. : _bill. ; _c20 cm. |
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| 504 | _aIncludes bibliographical references and index. | ||
| 520 | _a‘चक्का जाम’ की क़िस्सागोई बहा ले जाती है। देवानन्द दूबे की इस दुनिया में बंगाली माई का चमत्कार भी है और आज़ाद भारत में बचे एंग्लो-इंडियन समुदाय की त्रासदी भी; हवा में उड़ते संन्यासी भी हैं और छात्र-आन्दोलन को संरक्षण देती गृहिणियाँ भी। यह उपन्यास एक बड़े देश की बड़ी घटनाओं में उलझे इनसान के छोटे सपनों की कहानी है। यहाँ व्यक्तिगत आदर्श पारिवारिक, ऐतिहासिक और राजनैतिक आदर्शों की छाया से दूर, खुले आकाश में आज़ाद खिलने को बेचैन है। यह मासूम बेचैनी इस उपन्यास में कुछ इस तरह उभरती है कि पात्र, घटनाएँ और उनकी बोली-बानी पाठकों के दिल-दिमाग में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं। | ||
| 650 |
_aHindi fiction _916150 |
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| 650 |
_aPolitical fiction, Hindi _927855 |
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| 880 |
_6100-02 _aचक्का जाम / _cगौतम चोबे |
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| 942 | _cRB | ||
| 999 |
_c15367 _d15367 |
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