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040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a891.433
_bCHO/C
100 _aChoubey, Gautam
_eAuthor
_927837
245 _6880-02
_aChakka jaam /
_c Gautam Choubey
260 _aDelhi :
_bRadhakrishna Prakashan,
_c2024.
300 _a221 p. :
_bill. ;
_c20 cm.
504 _aIncludes bibliographical references and index.
520 _a‘चक्का जाम’ की क़िस्सागोई बहा ले जाती है। देवानन्द दूबे की इस दुनिया में बंगाली माई का चमत्कार भी है और आज़ाद भारत में बचे एंग्लो-इंडियन समुदाय की त्रासदी भी; हवा में उड़ते संन्यासी भी हैं और छात्र-आन्दोलन को संरक्षण देती गृहिणियाँ भी। यह उपन्यास एक बड़े देश की बड़ी घटनाओं में उलझे इनसान के छोटे सपनों की कहानी है। यहाँ व्यक्तिगत आदर्श पारिवारिक, ऐतिहासिक और राजनैतिक आदर्शों की छाया से दूर, खुले आकाश में आज़ाद खिलने को बेचैन है। यह मासूम बेचैनी इस उपन्यास में कुछ इस तरह उभरती है कि पात्र, घटनाएँ और उनकी बोली-बानी पाठकों के दिल-दिमाग में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं।
650 _aHindi fiction
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650 _aPolitical fiction, Hindi
_927855
880 _6100-02
_aचक्का जाम /
_cगौतम चोबे
942 _cRB
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