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020 _a9789352665549 (hbk.)
040 _aIN-BhIIT
041 _ahin
082 _a930.1092
_bMUH/M
100 _aMuhammed, K.K.
_eAuthor
_927933
245 _6880-02
_aMain hoon bharatiya /
_c K.K. Muhammed
260 _aNew Delhi :
_bPrabhat Prakashan,
_c2018.
300 _a166 p. :
_bill. ;
_c20 cm.
504 _aIncludes bibliographical references and index.
520 _aयह पुस्तक एक पुरातत्त्वविद् की आत्मकथा है; जिन्हें अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण में कार्य करने का अवसर मिला। यह पुस्तक एक प्रेरणादायी सामग्री के रूप में सामने आती है; जिसमें यह वर्णन है कि किस प्रकार उन्होंने मार्क्सवादी इतिहासकारों की संगठित ताकत का मुकाबला उनके ही गढ़ में किया; कैसे एक अकेले व्यक्ति ने साम्राज्य से भिड़ंत की। भारतीय पुरातत्त्व विभाग किस प्रकार अपने आपको प्रस्तुत करे; इस संबंध में उनके सुझाव सामान्य जन में नई सोच पैदा करते हैं और भविष्य में इस विभाग की योजना बनानेवालों को दिशा-निर्देश देते हैं। वे इस बात पर बल देते हैं कि इस विभाग की अपार संभावनाओं को एक के बाद एक आनेवाली सरकारों ने भयंकर रूप से अनदेखा किया है। किसी सक्रिय पुरातत्त्वविद् की पहली प्रकाशित डायरी होने के कारण यह इस विषय की बारीकियों पर रोचक अंतर्दृष्टि देती है और स्पष्ट रूप से बताती है कि एक पुरातत्त्वविद् को किस प्रकार धार्मिक तथा क्षेत्रीय पक्षपातों से ऊपर उठना चाहिए। भारतीयता और राष्ट्रवाद का बोध जाग्रत् करनेवाली पठनीय कृति।
650 _aArchaeology
_zIndia
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650 _aArchaeologists
_zIndia
_vBiography.
_927939
880 _6100-02
_aमैं हूँ भारतीय /
_cके.के. मोहम्मद
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