Phir milogi /
Madhu Chaturvedi.
- Noida : Hind Yugm, 2025.
- 256 pages ; 20 cm.
Hindi novel.
फिर मिलोगी मधु चतुर्वेदी का प्रेम, स्मृति और स्त्री-मन की भावनात्मक जटिलताओं पर केंद्रित उपन्यास है। इसकी मुख्य पात्र वसुधा का वैवाहिक जीवन एक गहरे भावनात्मक सूनेपन से गुजर रहा है। उसके मन में वर्षों पहले एक ट्रेन-यात्रा के दौरान हुई एक आकस्मिक मुलाकात की स्मृति आज भी जीवित है। वह मुलाकात भले ही बहुत पीछे छूट चुकी है, लेकिन उससे जुड़ा आकर्षण और भावनात्मक अनुभव उसके भीतर से समाप्त नहीं होता।
कथा वर्तमान जीवन और अतीत की स्मृतियों के बीच चलते हुए प्रेम, बिछोह, दाम्पत्य जीवन, अकेलापन, अनकहा मोह और किसी प्रिय व्यक्ति को खोकर भी न भूल पाने की अनुभूति को सामने लाती है। लेखिका स्त्री-मन की सूक्ष्म भावनाओं और स्मृतियों में जीवित रहने वाले संबंधों को संवेदनशील शैली में प्रस्तुत करती हैं। इस दृष्टि से यह केवल प्रेम-कथा नहीं, बल्कि उन रिश्तों और मुलाकातों की कहानी है जो समाप्त हो जाने के बाद भी व्यक्ति के भावनात्मक संसार में बने रहते हैं।