TY - GEN AU - Mrinal, Nilotpal, TI - Visvaguru / SN - 9788119555543 (paperback) U1 - 891.433 PY - 2026/// CY - Noida : PB - Hind Yugm, KW - Hindi fiction KW - Hindi novels KW - Youth KW - India KW - Fiction KW - Education N1 - Hindi novel N2 - 'विश्वगुरु' नीलोत्पल मृणाल का समकालीन भारतीय समाज और युवा जीवन पर केंद्रित हिन्दी उपन्यास है। कथा में ग्रामीण और कस्बाई भारत से आने वाले युवाओं के सपनों, शिक्षा, रोजगार, अवसरों और सामाजिक संघर्षों को सत्ता तथा राजनीति की जटिल संरचनाओं के साथ जोड़ा गया है। चिन्मय, दर्पण, अंगद, कृपालु और लावण्या जैसे पात्र उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र, शिक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में संघर्ष कर रही है। उपन्यास में बेरोजगारी, दहेज, पारिवारिक संकट, जाति, धर्म, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के नैतिक संकट जैसे प्रश्नों को यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। दूसरी ओर, सत्ता, हिंसा और धन के गठजोड़ से जुड़े पात्र सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की दूसरी तस्वीर सामने लाते हैं। लेखक किसी एक विचारधारा या राजनीतिक पक्ष का समर्थन करने के बजाय समकालीन भारत के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक यथार्थ को अनेक पात्रों और परिस्थितियों के माध्यम से सामने रखते हैं। यह उपन्यास युवा आकांक्षाओं, अवसरों की असमानता, सामाजिक परिवर्तन और सत्ता-संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण साहित्यिक प्रयास है। ER -