Dhar /
Sanjeev
- 2nd ed.
- New Delhi : Radhakrishna Prakashan, 2024
- 200 pages ; 21 cm.
Society Fiction.
धार संजीव का प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास है, जिसमें संथाल परगना के आदिवासी जीवन, गरीबी, शोषण और सामाजिक संघर्ष का यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास में खनिज संपदा के दोहन, पर्यावरण के विनाश और विकास के नाम पर होने वाले विस्थापन से उत्पन्न समस्याओं को प्रस्तुत किया गया है। आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों, अस्तित्व और सम्मान की रक्षा के लिए शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष और प्रतिरोध करता है। रचना के माध्यम से लेखक ने आदिवासी अस्मिता, सामाजिक अन्याय और मानवीय संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है।
9788183618816 (Paperback)
Hindi fiction Tribal life Tribal society Social exploitation Mining and environment Social conflict