TY - GEN AU - Chattopadhyay, Sarat Chandra, TI - Gr̥hadāha SN - 9789352662678 (paperback) U1 - 891.443 PY - 2024/// CY - New Delhi PB - Prabhat Prakashan KW - Bengali fiction KW - Translations into Hindi KW - Love stories, Bengali KW - Marriage KW - India KW - Fiction N1 - Hindi translation of the Bengali novel Griha Daha N2 - गृहदाह शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है। उपन्यास में महिम, सुरेश और अचला के बीच संबंधों के माध्यम से प्रेम, विवाह, मित्रता, सामाजिक रूढ़ियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है। अचला का जीवन प्रेम और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच फँस जाता है, जबकि महिम और सुरेश के व्यक्तित्व एवं विचारधाराएँ कथा को गहरे भावनात्मक द्वंद्व की ओर ले जाती हैं। रचना में ब्रह्म समाज और रूढ़िवादी सामाजिक व्यवस्था के बीच वैचारिक अंतर, स्त्री की स्थिति तथा विवाह संस्था की जटिलताओं को भी प्रमुखता दी गई है। मानवीय संवेदनाओं, त्याग, ईर्ष्या, अहंकार और सामाजिक बंधनों का सूक्ष्म चित्रण इस उपन्यास को एक महत्वपूर्ण सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक कृति बनाता है। ER -